Home उत्तर प्रदेश औरैया में लगातार बढ़ता यमुना का जलस्तर दहशत में तटवर्तीय निवासी

औरैया में लगातार बढ़ता यमुना का जलस्तर दहशत में तटवर्तीय निवासी

बाढ़ से निचले इलाकों की फसल हुई बर्बाद

AURAIYA NEWS: जनपद स्थित अजीतमल क्षेत्र में यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से आसपास के इलाकों में बाढ़ जैसे हालत हो गये है, रविवार, सोमवार को कोटा बैराज राजस्थान से छोड़े गए तीन लाख क्यूसेक पानी का असर मंगलवार को यमुना, चंबल में दिखा। रविवार शाम से बढ़े जलस्तर का असर मंगलवार को भी दिखाई दिया। यमुना के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नदी  किनारे बसे गांवों में दहशत का माहौल है। वहीं प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। मंगलवार सुबह यमुना का पानी तेजी से बढ़ता हुआ गौहानी कलां मार्ग की रपट पुलिया के लगभग एक मीटर ऊपर तक पहुंच गया। सिकरोड़ी गांव के पास श्मशान घाट तक पानी आ गया है। ग्रामीणों को पिछली बार की बाढ़ की भयावह स्थिति याद आने लगी है। लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तहसील प्रशासन ने बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया है। वहीं प्रशासन ने राहत केंद्रों और राहत सामग्री की तैयारियां भी पूरी कर ली है। बाढ़ का असर सिकरोड़ी, गौहानी कलां, गौहानी खुर्द, जाजपुर, असेवटा, असेबा, जुहीखा, बडेरा, गूंज, ततारपुर, बबाइन सहित कई गांवों में पड़ सकता है। प्रशासनिक अमला मौके पर डटा हुआ है। तहसील अजीतमल के उपजिलाधिकारी निखिल राजपूत व तहसीलदार अविनाश कुमार, खंड विकास अधिकारी अतुल यादव प्रभावित क्षेत्रों का लगातार निरीक्षण कर लोगों को हर संभव मदद का भरोसा दिए हैं। उन्होंने गौहानी कलां, सिकरोड़ी, बड़ैरा, गूंज, ततारपुर आदि गांवों में निरीक्षण कर ग्रामीणों से बातचीत की और उन्हें सतर्क रहने की सलाह दी। उपजिलाधिकारी निखिल राजपूत ने बताया कि यमुना का जलस्तर मंगलवार शाम तक 112.5 मीटर पहुंच गया है। प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। गांव-गांव जाकर लोगों को पशुओं के लिए चारा व परिवार को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की अपील की जा रही है। सभी संबंधित विभागों को राहत व बचाव के निर्देश दिए गए हैं।
अजीतमल। कोटा डेम से छोड़े गये तीन लाख क्यूसेक पानी के वहाव से यमुना नदी का जल स्तर लगातार तेज गति से बढ़ने से किनारे बसे गांवों को बाढ़ ने घेरना शुरू कर दिया। मंगलवार को गौहानी कला गांव से रपटा का पुल पर पानी भर जाने से गांव के आने जाने का सम्पर्क मार्ग भी बन्द हो गया है। प्रशासन हर समय बाढ़ पर नज़र बनाए हुए है। यमुना पड़ोसी जनपद इटावा में पड़ने वाले गांव गड़ा कासदा के सम्पर्क मार्ग के किनारे पानी भर जाने से कभी भी रास्ता बंद हो सकता है, जिसके चलते सिकरोड़ी गांव से गढ़ा क़सदा गांव आते जाते लोग मार्ग से नहीं निकल सकेंगे। अगर इसी गति से जलस्तर में वृद्धि होती रही तो रात्रि तक सिकरोड़ी गॉव के अन्दर भी पानी पहुंचने की सम्भवाना है। जिसके चलते गांव में निजली सतह पर बने घरों की महिलायें अपने परिवार के साथ पलायन करने की चिंता सता रही है,
नाकाफी है बाढ़ राहत चौकियों में इंतजाम, तटवर्तीय इलाके के लोगों में दहशत
तहसील क्षेत्र में बाढ़ राहत के इंतजाम नाकाफी हैं। लंबी कवायद के बाद बाढ़ राहत चौकियां तो बना दी गई हैं, लेकिन कुछ एक को छोड़ ज्यादातर में इंतजाम नाकाफी हैं। इन्हीं राहत चौकियों में बाढ़ प्रभावित परिवारों को शिफ्ट किया जाना है। चौकियां नदियों के किनारे तट से कुछ दूर स्थित स्कूल-कॉलेजों तथा सरकारी भवनों में अस्थायी तौर पर बनाई गई हैं। इन राहत चौकियों पर लिखापढ़ी में स्टॉफ की तैनाती तो कर दी गई है। मगर मंगलवार को मीडिया की पड़ताल में यहां दो लेखपालों को छोड़कर अन्य विभागों के कर्मचारी नदारत दिखे। नदी किनारे बचाव कार्य के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं थी। न तो नाव और न ही कोई मोटरबोट आदि का इंतजाम नहीं था।