पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्माश्रम महराज की देखरेख में नवंबर तक चलेगा चातुर्मास
PRAYAGRAJ NEWS: संत, महात्मा चातुर्मास में लगे हुए हैं। देश के कोने – कोने के बड़ी संख्या में दण्डी संन्यासी मध्यप्रदेश के खण्डवा जिले में स्थित प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग ओमकारेश्वर के पास 10 जुलाई गुरु पूर्णिमा से चातुर्मास शुरू कर दिया है, जो नवंबर तक चलेगा। इस दौरान अखिल भारतीय दण्डी संन्यासी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्माश्रम महराज के नेतृत्व में बड़ी संख्या में दण्डी संन्यासी ओमकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के पास चातुर्मास कर रहे है।
पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्माश्रम महराज ने बताया कि सभी संत, महात्मा सुबह चार बजे उठकर नित्य क्रिया से निवृत्त होकर मां नर्मदा में स्नान के बाद भगवद भजन करते हैं। पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्माश्रम महराज ने बताया कि दोपहर में प्रसाद ग्रहण करने के बाद विश्राम करते हैं, फिर चाय, नाश्ता के बाद भगवद भजन करते हैं। उन्होंने बताया कि चातुर्मास नवंबर में पूरा होगा और उसके बाद शुभ कार्य शुरू, तब सभी संत, महात्मा अपने आश्रमों के लिए प्रस्थान करेंगे। उन्होंने बताया कि चातुर्मास के दौरान भगवान लक्ष्मी नारायण निद्रा में चले जाते हैं ऐसे में उनका सभी कार्य भगवान शिव शंकर, गणेश जी, कुबेर जी सहित सभी देवी-देवता संभालते हैं। उन्होंने बताया कि चातुर्मास के दौरान सभी संत, महात्मा अपने, अपने आश्रमों में भगवद भजन करते हुए भण्डारा करते हैं, इतना ही नहीं जीव, जंतु और जानवरों को खाना देते हैं। पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्माश्रम महराज ने बताया कि चातुर्मास के दौरान संत, महात्मा अपने कुटिया से नहीं निकलते हैं क्योंकि बारिश के दौरान बहुत से कीट,पतंगें, जीव ,जंतु सहित अन्य कीड़े निकलते हैं इन कीड़ों के पैर के नीचे दबकर मरने का डर रहता है। पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्माश्रम महराज ने कहा कि चातुर्मास में सभी लोगों को भगवद भजन, पूजन और जाप करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विशेषकर भगवान भोलेनाथ का मंदिर में दर्शन, पूजन और विधि विधान से अभिषेक करने से अक्षय पुण्य और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इन सभी संतों की सेवा राजस्थान के सूरजकुंड धाम, कुंभलगढ़ के स्वामी अवधेश चैतन्य महराज (दाता) कर रहे हैं। स्वामी अवधेश चैतन्य महराज कुंभलगढ़ में प्रतिवर्ष विशाल भण्डारा करते हैं जहां लाखों लोग प्रतिदिन दिन – रात प्रसाद ग्रहण करते हैं। उन्होंने बताया कि सच्ची सेवा अन्न से होती है ऐसे में अधिक से अधिक लोगों को दिन, रात खाना खिलाता हूं और उनका आशीर्वाद लेता हूं।







