Home उत्तर प्रदेश ऊंचाहार में इमाम हुसैन के यौमे पैदाइश पर जश्न, रातभर सजी महफ़िल

ऊंचाहार में इमाम हुसैन के यौमे पैदाइश पर जश्न, रातभर सजी महफ़िल

साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष शहंशाह आब्दी रहे उपस्थित

RAIBARELI NEWS:  पैग़म्बर मोहम्मद (स.अ.व.) के नवासे और करबला के नायक इमाम हुसैन के यौमे पैदाइश के अवसर पर जनपद रायबरेली के ऊंचाहार क्षेत्र में श्रद्धा और अकीदत के साथ जश्न मनाया गया। इस मौके पर सय्यद ज़फर अब्बास मरहूम की इमाम बारगाह अली मुक्तदा, मुस्तफाबाद ऊंचाहार में भव्य महफ़िल का आयोजन किया गया, जिसमें पूरी रात इमाम हुसैन की शान में कसीदे और नज़्में पढ़ी गईं। महफ़िल के दौरान शायरों ने अपने कलाम के जरिए इमाम हुसैन के जीवन, उनके सिद्धांतों और करबला में दिए गए बलिदान को याद किया। मौजूद अज़ादारों ने एक-दूसरे को यौमे पैदाइश की मुबारकबाद दी और इमाम हुसैन के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। इस कार्यक्रम में साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष शहंशाह आब्दी भी अज़ादारों के साथ शामिल हुए। फतेहपुर से तशरीफ़ लाए इमामे जुमा मौलाना आली जनाब सय्यद दानिश नक़वी साहब की मौजूदगी ने महफ़िल को खास बना दिया। महफ़िल की सदारत मौलाना आली जनाब सय्यद अली रज़ा रिज़वी साहब ने की, जबकि हौसला अफज़ाई के लिए ओवैस नक़वी भी मौजूद रहे। उल्लेखनीय है कि इमाम हुसैन का जन्म 3 शाबान 4 हिजरी (626 ई.) को मदीना में हुआ था। वे हज़रत अली (अ.स.) और हज़रत फ़ातिमा (स.अ.) के पुत्र थे। इमाम हुसैन ने सत्य, न्याय और मानवता के लिए अपना जीवन समर्पित किया। करबला की लड़ाई में यज़ीद के अत्याचार और अन्याय के खिलाफ खड़े होकर उन्होंने जो बलिदान दिया, वह न केवल इस्लामी इतिहास बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यौमे पैदाइश के अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि इमाम हुसैन का जीवन हमें यह सिखाता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और न्याय के मार्ग पर अडिग रहना चाहिए। उनके संदेशों को अपनाकर समाज में शांति, न्याय और भाईचारे को मजबूत किया जा सकता है।