Home आस्था इंसानियत की मेराज का नाम है फ़ातिमा ज़हरा:मौलाना फीरोज हैदर

इंसानियत की मेराज का नाम है फ़ातिमा ज़हरा:मौलाना फीरोज हैदर

शरीफ मंज़िल में फ़ातिमा ज़हरा की शहादत पर मजलिसें शुरू

ETAWA NEWS: रसूले खुदा की इकलौती मज़लूमा बेटी  फ़ातिमा ज़हरा की शहादत पर पांच दिवसीय मजालिसों का आयोजन शरीफ मंज़िल सैदबाड़ा इटावा में शुरू हो गया। मजलिस में बड़ी संख्या श्रद्धालुओं ने भाग लिया। शरीफ मंज़िल में पहली मजलिस का शुभारंभ सलीम रज़ा व सफीर हैदर ने सोजख्वानी से किया। अश्शू रिज़वी, सलमान रिज़वी ने कलाम पेश किए। तनवीर हसन ने नोहा ख्वानी की। मजलिस में तक़रीर करते हुये जनपद कानपुर से आये मौलाना फीरोज़ हैदर ने कहा अल्लाह फरमाया कि मोहम्मद न होते तो कायनात में कुछ न होता, पूरी कायनात मोहम्मद के सदके में बनाई। अल्लाह फिर फरमाता है कि अगर फ़ातिमा न होतीं तो न रसूल होते, न अली होते और न ही कायनात होती। मौलाना फीरोज़ हैदर ने कहा कि घर मे अगर ए.सी., कूलर, लाइटें लगीं हैं मगर बिजली कनेक्शन नहीं है तो सब बेकार हैं इसी तरह जब तक एहलेबैत की मोहब्बत दिल मे नहीं है तब तक सारी इबादतें बेकार हैं। रसूल अल्लाह की इकलौती बेटी और इंसानियत की मेराज का नाम फ़ातिमा ज़हरा है। रसूल अल्लाह को फख्र (गर्व) था कि फ़ातिमा ज़हरा उनकी बेटी हैं। रसूल अल्लाह ने फरमाया है कि जिससे फ़ातिमा खुश उससे हम खुश और जिससे फ़ातिमा नाराज उससे हम नाराज।उन्होंने कहा रसूल की उसी बेटी पर जालिमों ने बेपनाह जुल्म ढाए, फ़ातिमा ज़हरा के घर में जालिमों ने आग लगा दी जिससे वह जख्मी हो गईं। इतना ही नहीं जालिमों ने उनका हक भी नहीं दिया। मजलिस में अल्हाज कमर अब्बास नक़वी करबलाई, हाजी अरशद मरगूब, शावेज़ नक़वी, हसन अब्बास, मो. मियां, तहसीन रज़ा, राहत हुसैन रिज़वी, अली साबिर, इबाद रिज़वी, अख्तर अब्बास रिज़वी, राहिल सग़ीर, ज़हूर नक़वी सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।