LAKHIMPUR KHERI NEWS: आशा और आशा संगिनी कर्मियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन के बैनर तले, उन्होंने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक ज्ञापन भेजा।इसमें प्रदेश में जारी आशा कर्मियों की हड़ताल का संज्ञान लेने और तत्काल वार्ता बुलाकर समस्याओं का समाधान करने की मांग की गई है।आशा वर्कर्स यूनियन का कहना है कि आशा और आशा संगिनी वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ के रूप में कार्य कर रही हैं। इसके बावजूद, उन्हें न्यूनतम सुविधाएं और उचित पारिश्रमिक नहीं मिल पा रहा है। यूनियन ने बताया कि वर्ष 2019 से लंबित प्रोत्साहन राशियों का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। इसके अतिरिक्त, आयुष्मान गोल्डन कार्ड और आभा आईडी बनाने में करोड़ों के योगदान के बावजूद उन्हें कोई भुगतान नहीं मिला है।यूनियन की प्रमुख मांगों में आशा और आशा संगिनी को मानद स्वयंसेवक के बजाय सरकारी कर्मचारी का दर्जा देना शामिल है। उन्होंने न्यूनतम वेतन लागू करने, ईपीएफ-ईएसआई की सुविधा प्रदान करने और सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी देने की भी मांग की है।इसके अतिरिक्त, 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और 50 लाख रुपये का जीवन बीमा सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई गई है।मांग पत्र में बेहतर कार्य दशाएं, कार्य सीमा का निर्धारण, आशा कर्मियों के लिए 21 हजार रुपये और आशा संगिनी के लिए 28 हजार रुपये मासिक मानदेय की मांग की गई है। इसमें यात्रा भत्ता, मोबाइल व इंटरनेट सुविधा, लंबित प्रोत्साहन राशि का तत्काल भुगतान, मृतक आशा कर्मियों के परिजनों को मुआवजा और निजी अस्पतालों से जुड़े मामलों में दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग भी शामिल है।प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने “हम सब एक हैं, आशा एकता जिंदाबाद”, “2000 में दम नहीं, 21000 से काम नहीं” और “इंकलाब जिंदाबाद” जैसे नारे लगाए।उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन की जिला सचिव मनीषा मिश्रा ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शीघ्र वार्ता कर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।







