Home उत्तर प्रदेश असंतुलित उर्वरक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता घट रही: डॉ. मनोज सिंह

असंतुलित उर्वरक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता घट रही: डॉ. मनोज सिंह

KAUSHAMBI NEWS: उर्वरकों के असंतुलित उपयोग से मिट्टी की घटती उर्वरता को लेकर कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों को जागरूक किया जा रहा है। इसी क्रम में विकास खंड कौशांबी के ग्राम बैंगवा फतेहपुर में किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार सिंह ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में यूरिया एवं डीएपी का अत्यधिक और असंतुलित प्रयोग मिट्टी में पोषक तत्वों के असंतुलन का प्रमुख कारण बन रहा है। इससे न केवल मृदा की दीर्घकालीन उर्वरता प्रभावित हो रही है, बल्कि उर्वरकों की उपयोग दक्षता भी घट रही है। डॉ. सिंह ने किसानों को मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि फसल की आवश्यकता के अनुसार संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन जरूरी है। उन्होंने बताया कि अंधाधुंध यूरिया और डीएपी के स्थान पर एनपीके कॉम्प्लेक्स, एसएसपी, जैव उर्वरक, कार्बनिक खाद तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग करने से मिट्टी की सेहत में सुधार होता है और उत्पादन लागत भी कम होती है। उन्होंने विशेष रूप से धान आधारित फसल प्रणाली में फॉस्फोरस की अधिकता की समस्या की ओर ध्यान दिलाते हुए वैज्ञानिक अनुशंसा के अनुसार ही फॉस्फोरस के संतुलित उपयोग की बात कही। इस दौरान किसानों को फार्मर रजिस्ट्री के प्रति भी जागरूक किया गया। डॉ. सिंह ने बताया कि फार्मर रजिस्ट्री कराने से किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिलेगा, साथ ही कृषि विभाग की योजनाओं में प्राथमिकता भी प्राप्त होगी। इससे किसानों की भूमि और फसल संबंधी जानकारी डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगी।
कार्यक्रम में प्रगतिशील किसान अनुज कुमार, सुभाष कुमार, अरविंद, चीन बाबू, शिवमोहन लाल सहित क्षेत्र के अन्य किसानों ने भाग लिया। इस अवसर पर संतुलित उर्वरक उपयोग, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार उर्वरक प्रयोग की जानकारी दी गई।