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अधर्म खत्म करने को भगवान लेते है अवतार रू स्वामी अनंताचार्य अमृत महराज

PRAYAGRAJ NEWS: काली श्री सिद्ध बाबा महाराज हटा के दरबार में सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवद महापुराण की कथा में चतुर्थ दिवस की कथा में अंतरराष्ट्रीय मंच कथा व्यास श्रीमद्जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी अनंताचार्य अमृत जी महराज ने बताया कि भगवान का अवतार धर्म की पुनर्स्थापना के लिए होता है और केवल एक युग में नहीं बल्कि जब – जब धर्म की हानि होती है तब – तब भगवान का अवतार होता है। जगदगुरू स्वामी अनंताचार्य अमृत जी महराज ने बताया कि कंस के राज्य में पाप चरम सीमा पर पहुंच गया था, यज्ञ बंद हो गए,स्त्रियों की ब्राह्मणों की, साधु – संतों की कोई इज्जत नहीं बची।  अत्याचार बढ़ने लगा तब पृथ्वी ने गौ माता का रूप बनाया और देवसभा में पहुंची जहाँ यह बात पक्की हुई कि भगवान के अलावा ओर कोई रक्षा करने वाला नहीं है, तो भगवान ने आकाशवाणी के माध्यम से कहा कि चिंता मत करो मेरा अवतार होगा उसके बाद माता देवकी के गर्भ से आठवीं संतान के रूप में भगवान का अवतार हुआ। बासुदेव जी महराज भगवान को गोकुल ले गए जहां माता यशोदा के गर्भ से योगमाया का जन्म हुआ था जिसे बाबा मथुरा ले आए जो कंस को ज्ञान देकर विंध्याचल पर्वत पर जाकर माता विन्ध्वासनी के नाम से पूजित हुई।