Home आस्था अज़ाखाना सानी-ए-जहरा से साठे का कदीमी जुलूस निकाला गया

अज़ाखाना सानी-ए-जहरा से साठे का कदीमी जुलूस निकाला गया

ताबूत और जुलजनाह को देखकर रोने लगे अज़ादार

MIRZAPUR NEWS: शनिवार की देर शाम चेतगंज स्थित मरहूम डॉ. सैय्यद मुज्तबा हुसैन रिज़वी के अज़ाखाना सानी-ए-जहरा से बाद-ए-मजलिस शबीहे जुलजनाह, अलम और ताबूत-ए-इमाम हुसैन (अ.स.) का कदीमी जुलूस बड़े अदब व एहतराम से निकाला गया। इस मौके पर बिहार से आए मौलाना सैय्यद जुल्फ़िकार हुसैन ने मजलिस को खिताब किया। करबला के शहीदों की याद में नदीम हैदर पाशा, मिजराब मिर्ज़ापुर और मासूम रज़ा ने दर्दभरे नोहे पेश किए तो अज़ादार ग़मगीन होकर मातम करने लगे। पूरे रास्ते नौहा और मातम का सिलसिला जारी रहा। जुलूस ईमाम हुसैन अलैहिस्सलाम व उनके भांजे औन और मोहम्मद (अ.स.) की याद में निकाला गया। यह दोनों इमाम हुसैन (अ.स.) की बहन जनाबे ज़ैनब बिन्ते अली (स.) के नन्हें बेटे थे, जिन्हें करबला की जंग में यजीदी फौज ने मोहर्रम के पांचवें रोज़ बेरहमी से शहीद कर दिया था। नफीसुल हुसैन रिज़वी ने माशायब बयान करते हुए कहा कि जब एक-एक कर सभी असहाब शहीद हो चुके थे तो जनाबे ज़ैनब ने अपने दोनों बेटों को जंग की इजाज़त दिलाई। औन महज़ 11 और मोहम्मद 12 साल के थे, लेकिन दोनों ने जंग में ऐसी बहादुरी दिखाई कि यजीदी फौज हिल उठी। दोनों बच्चों ने ऐसी जंग की कि यजीदी फ़ौज में भगदड़ मच गई। ऐसी हालत देख उमरे साद ने फ़ौज से कहा कि ये हाशमी शेर हैं। इन दोनों को अलग कर फिर हमला करो।बाद में धोखे से उन्हें अलग कर जख़्मी किया गया और वे घोड़े से गिर पड़े। आखिरी वक़्त में उन्होंने अपने मामू इमाम हुसैन (अ.स.) से कहा कि “मां से किया वादा पूरा कर दिया। जुलूस अपने परंपरागत रास्ते से होकर इमामबाड़ा स्थित कर्बला पहुंचा जहां नौहा, मातम और माशायब पढ़े गए। जुलूस में मौला अब्बास का अलम और इमाम हुसैन (अ.स.) का वफादार घोड़ा जुलजनाह भी शामिल रहा।अलम और जुलजनाह, इमाम हुसैन(अ.स) का ताबूत देखकर अज़ादार फफक-फफक कर रोने लगे। इस मौके पर दानिश रिज़वी, आदिल रिज़वी, मिसम रिज़वी, फ़ैज़ान रिज़वी, कविश रिज़वी, तनवीर रज़ा, फै़मी, फ़रहान रज़ा, निज़ाम हुसैन, एहसन रज़ा, ईरशाद अंसारी, रिज़वान अंसारी समेत बड़ी तादाद में अज़ादार शामिल हुए।