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अच्छे व बुरे समय में जीवनसाथी का साथ देना ही शाश्वत प्रेम का रहस्य है- शालिनी त्रिपाठी

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नितिन जायसवाल
बबुरी, चंदौली। क्षेत्र के बौरी ग्राम सभा में मानस प्रचार सेवा समिति द्वारा आयोजित संगीतमय श्री राम कथा में बुधवार को व्यास पीठ पर विराजित मानस मयूरी शालिनी त्रिपाठी ने राम-जानकी विवाह का प्रसंग सुनाया। राम-जानकी प्रसंग सुन पूरा पांडाल खुशी से झूठ उठा। कथा में बताया कि सीता स्वयंवर पर प्रत्यंचा चढ़ाना कोई सरल कार्य नहीं था। राम ने जनकपुर के स्वयंवर में अपनी अदभुत वीरता दिखाई और जिस धनुष को राजा महाराजा हिला नही सकें उस धनुष को उठाकर रामजी ने सीता से विवाह किया। माता सीता ने रामजी के गले में वर माला डालकर उन्हे पति के रूप में स्वीकार किया। राम कथा में सीता की बिदाई हुई । उन्होंने कहा कि जनकपुर से जब सीताजी की बिदाई हुई तब उनके माता-पिता ने उन्हें ससुराल में कैसे रहना है इसकी सीख दी। प्रत्येक माता-पिता को अपनी पुत्री के विवाह के समय ऐसी ही सीख देनी चाहिए। कन्या को ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिये जिससे ससुराल व मायका दोनों कुल कलंकित हो। माता सीता ने पूरे जीवन अपने माता पिता की सीख का पालन किया ओर जीवन में कष्ट सहन करते हुए भी कोई अनुचित कार्य नहीं किया। कथा वाचिका ने बताया कि देवी सीता की यदि हम कुछ बातें अपने जीवन में अपना ले तो हमारी कई समस्याएं आसानी से खत्म हो जाएंगा और हमारा जीवन बेहद सुखी शांतिपूर्ण और प्रेम से भरपूर हो जाएगा। भगवान राम को अपने पूरे जीवन में बहुत सारी समस्याओं और कठिनाइयों का सामना करना पड़ा लेकिन उन्हें हर कदम पर सीता माता का समर्थन मिला। इसके द्वारा सीता माता ने संदेश दिया कि व्यक्ति को अपने जीवनसाथी का हर अच्छे और बुरे समय में साथ देना चाहिए यही जीवनसाथी के बीच शाश्वत प्रेम का रहस्य है। कथा के दौरान वीरेंद्र सिंह, हरिवंश सिंह, जितेंद्र गुप्ता, आशीष सिंह, दधिबल सिंह, राजू सिंह, मृदुल विश्वास, रामदास, सोहन बिंद, राजन गुप्ता सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।