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अगर यह हुआ तो बिहार में पहली बार! कांग्रेस कार्यसमिति से कम नहीं सोनिया गांधी का इंतजार

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Bihar News : बिहार में कांग्रेस कार्यसमिति की विस्तारित बैठक हो रही है, जिसमें पार्टी अध्यक्ष समेत CWC के 86 सदस्यों के साथ राज्यों के कांग्रेसी सीएम, डिप्टी सीएम, प्रदेश अध्यक्ष आदि आ रहे हैं। लेकिन, रिकॉर्ड तो उससे भी अलग बनेगा, अगर…

Congress CWC Meeting : बुधवार की सुबह का बिहार के हर कांग्रेसी को इंतजार है। इंतजार मीडिया भी कर रही है। पूरा शहर पोस्टरों से सजा है। कांग्रेस की राष्ट्रीय स्तर की ऐसी बैठक पहली बार जो है। लेकिन, उससे भी बड़ी बात यह होगी कि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी- तीनों अगर आ गए। ‘अगर’ की वजह भी है। दरअसल, राहुल गांधी का नाम 100 प्रतिशत पक्का है। सोनिया गांधी CWC सदस्य हैं, लेकिन तबीयत ठीक नहीं रहने के कारण वह नहीं भी आ सकती हैं। कांग्रेसी उनके आने को लेकर जहां उत्साहित हैं, वहीं नहीं आने को लेकर सशंकित भी। इसके अलावा, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी CWC की बैठक में आएंगी तो उन्हें फिर दिल्ली जाकर दोबार 26 को मोतिहारी आने के लिए बिहार आना पड़ेगा। मतलब, कई तरह के ‘अगर-मगर’ हैं। लेकिन, तीनों आ गए तो सदाकत आश्रम और कांग्रेस को नई ऊर्जा मिलेगी- तय है।
विपक्षी गठबंधन की पहली बैठक से सोनिया का इंतजार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के खिलाफ 2023 में पटना में हुई विपक्षी दलों की पहली बैठक से ही सोनिया गांधी के पटना आने का इंतजार हो रहा था। वह नहीं आईं। आ जातीं तो कांग्रेस नेताओं को उसी समय कुछ संबल मिलता। उसके बाद लोकसभा चुनाव हुआ और राहुल गांधी भी बिहार पर ध्यान देते नजर नहीं आए। लोकसभा चुनाव की कमान बिहार में तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी ने संभाले रखी। लेकिन, 2025 में राहुल गांधी अप्रत्याशित रूप से सक्रिय हैं। लगातार न केवल खुद आ रहे हैं, बल्कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को भी साथ ला रहे या भेज रहे हैं। इस बार तो उन्होंने कांग्रेस कार्यसमिति की विस्तारित बैठक ही यहां बुला ली। इस बैठक में सीडब्ल्यूसी सदस्य के रूप में सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी को भी आना है।

कांग्रेस कार्यसमिति की इस बैठक से पहले राहुल गांधी वोटर अधिकार यात्रा के लिए बिहार में लंबा घूम चुके हैं। बाइक पर बहन प्रियंका गांधी को भी घुमा चुके हैं। अब इस परिवार से सोनिया गांधी का ही आना बाकी रह गया था। आज वह आ जाती हैं तो इससे सत्ता पक्ष के साथ-साथ कांग्रेस के सहयोगी दलों को भी संदेश जाएगा। कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक पहली बार बिहार में करते हुए कांग्रेस ने बिहार के कांग्रेसियों को पिछली सदी जैसी सक्रिय परिस्थिति में ले जाने का संदेश तो पहले ही दे दिया है। चाणक्या इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिकल राइट्स एंड रिसर्च के अध्यक्ष सुनील कुमार सिन्हा कहते हैं- “इस बैठक से सत्ता पक्ष को यह संदेश साफ तौर पर दे दिया है कि यह परिवार बिहार की राजनीति में कांग्रेस को वापस लाने के लिए हर जतन कर रहा है। इसके साथ ही, अपने साथियों को भी कांग्रेस यह संदेश देना चाह रही है कि उसे आंख दिखाने की कोशिश न करे।”

राजद कांग्रेस को ज्यादा समझौते का दबाव दे रहा
दरअसल, बिहार चुनाव 2020 में 70 सीटों पर लड़कर 19 विधायक लाने वाली कांग्रेस इस बार भी उतनी सीटों से संतोष करना चाहती थी, लेकिन राजद उसे 50 सीटों पर लाना चाह रहा है। बात 57-58 पर आकर अटक सकती है, अगर बहुत हंगामा नहीं हुआ तो। बिहार कांग्रेस प्रभारी ने पिछली दिनों दिल्ली में बैठक के बाद पटना लौटकर कहा था कि गठबंधन में नए दलों को सीटें देने के लिए सभी को थोड़ा-बहुत समझौता करना पड़ सकता है।