PRATAPGARH NEWS: होलियाना अंदाज, होलियाना माहौल और होलियाना पंक्तियों ने ऐसा रंग जमाया कि लोग आनंद के सागर में उतरते चले गए। राजनीति से लेकर समाज के विभिन्न विषयों पर कवियों ने बेबाकी से अपनी बात रखी। लीला पैलेस सेनानी चौक मीरा भवन में आयोजित 27वें होली हंगामा कवि सम्मेलन में हास्य व्यंग्य के साथ सच्चाई भी मुखरित हुई। शाम से रात ढलते हुए भोर ने कब दस्तक दे दी, पता न चला। आयोजन सामाजिक समरसता का गुलदस्ता भी महका। हैदरगढ़ बाराबंकी के प्रसिद्ध गीतकार शिव किशोर खंजन की रचनाएं खूब सुनी गईं। उन्होंने सुनाया…जब तक सीमा पर एक भी वीर जवान रहेगा, तब तक यह मेरा भारत देश महान रहेगा। लोकभाषा के प्रसिद्ध कवि डा. राजेश कुमार पांडेय निर्झर प्रतापगढ़ी ठेठ अंदाज में कहा…कुकुर केतनो कंठी बांधे दो चटबै तो करी, कीरा कितना फन सिकोरे लेकिन कटबै तो करी। बनारस के अंबुज मिश्रा ने दिलों में हलचल पैदा की…जिसको चाहा निकटतम नहीं हो सका, प्रेम तद्भव से तत्सम नहीं हो सका। अध्यक्षता कर रहे गजलकर राज मूर्ति सिंह सौरभ ने पढ़ा…लाल गुलाबी बैगनी, नीले पीले श्याम, प्यार मोहब्बत दोस्ती रंगों के पैगाम। लोगों में जोश भरते हुए रायबरेली के राज किशोर सिंह किशोर की पंक्तियां छा गईं…खून और पानी साथ न बहेंगे अब, इसी मूल मंत्र पर विचार होना चाहिए। कोई उग्रवादी कैंप बचने न पाए कहीं, कड़ा से कड़ा अब प्रहार होना चाहिए। इं. चंद्रकांत त्रिपाठी शाश्वत के गीतों की रसवर्षा में लोग खूब भीगे। गीतकार सुनील प्रभाकर ने गीत सुनाया…हमारी तुम्हारी कहानी बनेगी, ये सदियों चलेगी निशानी बनेगी। ठहर जाएंगे दो घड़ी जिस जमीं पर, वहीं प्रेम की राजधानी बनेगी। चंद्र प्रकाश पांडे मंजुल ने सुनाया…बहै बसंती बहार सुना, हियां फागुन मां बाबा देवर लागें। कार्यक्रम का जोरदार ढंग से संचालन कर रहे प्रसिद्ध गीतकार डा. श्याम शंकर शुक्ल श्याम ने पढ़ा…कृष्ण की बांसुरी राधिका नाम है, रंग बरसाना है वृंदावन धाम है। प्रेम के रंग में रंग दो यह प्यारी धरा, होलिका प्यार का दूसरा नाम है। हास्य रसावता डंडा बनारसी ने पाकिस्तान को दुत्कारा…वह सरहद से बजाते थे नफरत की बांसुरी, हमने जब बांस बजाया तो बुरा मान गए। प्रेम कुमार त्रिपाठी ने साफ कहा…जिंदगी उधार है, प्रेम में उधार दो। अनूप अनुपम ने सुनाया…वंदन है अभिनंदन माता, तेरी जय जयकार करूं। झूठ और फरेबी पर मैं कलम से अपने वार करूं। कार्यक्रम में गजेंद्र सिंह विकट, उजड्ड जौनपुरी, अनूप त्रिपाठी, हरिवंश शुक्ल शौर्य, शीतल सुजान, सुधीर रंजन द्विवेदी के साथ ही कवियत्री सुप्रिया, पूनम मिश्रा, कल्पना तिवारी ने भी काव्य पाठ करके मंच को सार्थक स्वरूप प्रदान किया।
पंक्तियों पर बजती रहीं तालियां
विधायक रामपुर खास आराधना मिश्रा मोना के प्रतिनिधि ज्ञान प्रकाश शुक्ल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रमोद मौर्या, भाजपा के वरिष्ठ नेता डा. आशुतोष त्रिपाठी, ट्रक आपरेटर यूनियन के जिलाध्यक्ष विजय सिंह, सपा नेता अश्वनी सोनी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष डा. नीरज त्रिपाठी, व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष राजेंद्र केसरवानी, भाजपा के जिला प्रवक्ता राघवेंद्र नाथ शुक्ल, अपना दल विधि मंच के नेता परमानंद मिश्रा, वकील परिषद के पूर्व अध्यक्ष सूर्यकांत मिश्र निराला, भाजपा नेता और समाजसेविका सुशीला सरोज, बेलखरनाथ धाम के संस्थापक व कृष्णायन मानस के रचयिता शिवहर्ष ब्रह्मचारी के परिवार के पूर्व बैंक अधिकारी रामकुमार ओझा, समाजसेवी अनिल प्रताप त्रिपाठी प्रवात, शिक्षाविद राजेश मिश्र, डा. अनूप कुमार पांडेय, शिक्षक डा. अमित पांडेय आदि भी कवियों को सराहा।
सामाजिक कार्यों पर मिला सम्मान
इस अवसर पर पूर्व सीएमएस वरिष्ठ सर्जन डा. एसी त्रिपाठी, डा अमोद शुक्ला, वरिष्ठ संस्कृताचार्य पंडित भैया राम त्रिपाठी, निशुल्क विधिक जन सेवा समिति के अध्यक्ष संतोष त्रिपाठी, बच्चा बैंक के पदाधिकारी अनुज शुक्ला व शशांक मिश्रा, समाज सेविका सुशीला सरोज समेत विशिष्ट लोगों को सम्मानित किया गया। आयोजन समिति के संरक्षक कथा व्यास पं. अवध नारायण शुक्ल वियोगी महाराज ने स्वस्तिवाचन कर कार्यक्रम को दिशा दी। भाजपा के वरिष्ठ नेता, अखिल भारतीय चंद्र सेनानी स्मारक न्यास के प्रमुख शिव प्रकाश मिश्र सेनानी ने कहा कि होली के रंगों की तरह मिलकर रहना ही ऐसे आयोजनों का संदेश होता है। 27 साल से कायम यह परंपरा प्रतापगढ़ की पहचान से जुड़ गई है।








