हाफिज कैफ अहमद ने सुनाया मुकम्मल कुरान, नमाज़ की पाबंदी पर दिया जोर
PRAYAGRAJ NEWS: अतरसुइया रानी मंडी स्थित हकीम जी की मस्जिद में नौ रोज़ा तरावीह मुकम्मल होने पर खास दुआ और बयान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हाफिज-ए-कुरान कैफ अहमद ने मुकम्मल कुरान सुनाया और नमाज की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि केवल तरावीह या रोज़ा रखने से ही नहीं, बल्कि पांच वक्त की फर्ज नमाज़ की पाबंदी से अल्लाह की रज़ामंदी हासिल होती है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि नमाज़ इस्लाम का स्तंभ है और यह हुज़ूर-ए-अकरम हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की आंखों की ठंडक है। मुसलमानों को चाहिए कि वे सबसे पहले अपनी फर्ज नमाज़ों की पाबंदी करें और गुनाहों से बचें, क्योंकि क़यामत के दिन सबसे पहले नमाज़ का हिसाब लिया जाएगा। हाफिज कैफ को हाफिज-ए-कुरान बनाने में उनकी वालिदा की विशेष भूमिका रही। परिवार ने अपने दो बेटों और दो बेटियों को दुनियावी और दीनी तालीम दिलाई। कैफ के हाफिज बनने के बाद अब लोग उनके माता-पिता को हाफिज कैफ के वालिद और वालिदा के नाम से पहचानने लगे हैं।
कुरान मुकम्मल होने के बाद हाफिज कैफ ने दुआ-ए-खैर कराई। उल्लेखनीय है कि वे तरावीह के एवज में किसी प्रकार का रुपया, पैसा या तोहफा स्वीकार नहीं करते। तरावीह नमाज़ में मोहम्मद फैयाज, मोहम्मद इम्तियाज, मोहम्मद सदीक, मोहम्मद सैफ, मोहम्मद शारिक, शेरू, असद, आदिल, ‘डाबर भाई, मोहम्मद अकरम, सोहेल समेत सैकड़ों नमाज़ी शामिल हुए।








