VARANASI NEWS: हरिश्चंद्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय, वाराणसी के बी.एड. विभाग द्वारा ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय संवाद सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को सोमनाथ मंदिर की राष्ट्रीय पहचान, प्राचीन इतिहास की विविध परतें, धार्मिक सहिष्णुता, पुनर्निर्माण और सांस्कृतिक स्मृति से अवगत कराना था। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारतीय सभ्यता के सांस्कृतिक गौरव और अनवरत आस्था का प्रतीक है, क्योंकि यह मंदिर कई युगों में विनाश और पुनर्निर्माण के चक्र से गुज़रा है और आज भी अपनी सांस्कृतिक पहचान को उजागर करता है। कार्यक्रम की शुरुआत भारतेन्दु हरिश्चंद्र एवं माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण तथा सरस्वती वंदना से हुई। तत्पश्चात् ‘रुद्राष्टक’ का पाठ प्रो. अनुपम शाही द्वारा किया गया। संवाद में मुख्य वक्ता और महाविद्यालय के उप-प्राचार्य प्रो. विश्वनाथ वर्मा ने कहा कि सोमनाथ मंदिर पर पहला दस्तावेजीकृत हमला 1026 में हुआ, लेकिन यह विश्वास और संस्कृति का अभिन्न प्रतीक बना रहा। दूसरे वक्ता डॉ. देवेंद्र प्रताप सिंह ने वेदों-उपनिषदों में मंदिर के आध्यात्मिक उल्लेख तथा स्वतंत्रता के बाद के पुनर्निर्माण पर विस्तृत चर्चा की।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने विषय विशेषज्ञों से इतिहास के संदर्भ, सांस्कृतिक महत्त्व और मंदिर के पुनर्निमाण से जुड़े प्रश्न पूछे, जिससे एक जीवंत शैक्षणिक विमर्श का सृजन हुआ। बी.एड. विभाग की प्रभारी प्रो. अनिता सिंह ने इस पर्व के माध्यम से शिक्षण-अधिगम तथा शिक्षक शिक्षा में इसकी महत्ता पर बल दिया। यह कार्यक्रम राज्य स्तरीय ज्योतिर्लिंग एवं आध्यात्मिक आयोजन के क्रम में मनाया गया। संवाद का संचालन डॉ. अनिल कुमार ने किया, धन्यवाद ज्ञापन प्रो. अनुराधा राय ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में 70 से अधिक विद्यार्थियों सहित प्रो. अशोक कुमार सिंह, प्रो. कनकलता विश्वकर्मा, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. विनीत सिंह, डॉ. रविकांत कसौधन इत्यादि प्राध्यापकगण उपस्थित रहे।







