Home उत्तर प्रदेश साहित्य व्यक्ति की नहीं, समाज की पीड़ा को करता है दूर.. रामसुचित

साहित्य व्यक्ति की नहीं, समाज की पीड़ा को करता है दूर.. रामसुचित

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एक दर्जन से अधिक ग्रंथों का विमोचन
साहित्यिक गतिविधियों के साथ काव्यांगन का दो दिवसीय वार्षिक उत्सव सम्पन्न
प्रातःकाल एक्सप्रेस
प्रयागराज। काव्यांगन साहित्यिक मंच के दूसरे दिन प्रातः काल से ग्रंथों का विमोचन और साहित्यिक विमर्श का कार्यक्रम राज्य शिक्षक प्रशिक्षण अतिथि गृह में आज संपन्न हुआ। प्रथम सत्र में काव्यांगन के संस्थापक स्व प्रो रामकृष्ण शर्मा की स्मृति में सम्मान समारोह का आयोजन हुआ। यह सम्मान लोकेश कुमार शुक्ला पूर्व निदेशक आकाशवाणी को दिया गया। प्रो विनोद कुमार सिंह सदस्य शिक्षा सेवा चयन आयोग एवं विमल कुमार विश्वकर्मा सदस्य शिक्षा सेवा चयन आयोग को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि लोकेश कुमार शुक्ला ने कहा कि साहित्यिक गतिविधियां मानव जीवन को सात्विकता की ओर ले जाती हैं और उनकी सांस्कृतिक विरासत का पोषण करती हैं। उन्होंने अपनी एक रचना पढ़ते हुए कहा कि मैंने भी जीवन देखा है,आज उनकी पलकों में,मैंने एक आधार देखा है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो विनोद कुमार सिंह ने कहा कि प्रयागराज की धरती साहित्य दृष्टि से पहले से ही उर्वरक है और काव्यांगन के इस कार्यक्रम ने इस पावन धरती को और महत्वपूर्ण बना दिया।
द्वितीय सत्र भी साहित्यिक गतिविधियों और विमोचन के लिए समर्पित रहा। मुख्य अतिथि प्रो ऋराज नारायण शुक्ला सदस्य शिक्षा सेवा चयन आयोग ने विचार व्यक्त किया।
समापन सत्र में काव्यांगन के ग्रंथ अब चले आओ का लोकार्पण उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष राम सुचित ने किया जबकि अध्यक्षता प्रो योगेंद्र प्रताप सिंह इविवि ने की। शिक्षा सेवा चयन आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष राम सुचित ने कहा कि साहित्य व्यक्ति की ही नहीं बल्कि समाज की पीड़ा को भी दूर करता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के संकल्पों को पूरा करने में कवियों ने बहुत बड़ा योगदान दिया है और उनकी जनाकांक्षाओं को ही प्रकट करने में कवियों की प्रमुख भूमिका रही है। उन्होंने 70 से अधिक साहित्यकारों को सम्मानित किया साहित्यिक विमर्श के पश्चात साहित्य की और खासतौर से हिंदी की बढ़ती लोकप्रियता और उपयोगिता को सभी साहित्यकारों ने रेखांकित किया।कार्यक्रम का संयोजन और संचालन रमापति त्रिवेदी, प्रो राधाकृष्ण दीक्षित और विवेक गोयल ने किया। कार्यक्रम के अंत में सभी को आभार व्यक्त किया गया और वंदे मातरम के साथ कार्यक्रम कासमापन हुआ।