रावण से जुड़ी मान्यता और रुद्रवंती औषधि से बढ़ता है धाम का आध्यात्मिक महत्व
FATEHPUR NEW6: (शीबू खान फतेहपुर)) जनपद की खागा तहसील क्षेत्र के मझिलगांव में स्थित प्राचीन कुंडेश्वर महादेव मंदिर आस्था, इतिहास और रहस्य का अद्भुत संगम माना जाता है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर खागा से लगभग आठ किलोमीटर दूर प्रयागराज मार्ग पर स्थित यह सिद्धपीठ वर्षभर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना रहता है। यूं तो वर्षभर मंदिर में श्रद्धालुओं का आगमन बना रहता है, लेकिन श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां आस्था का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ता है। हजारों श्रद्धालु गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग और पुष्प अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं तथा परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्यता और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मांगते हैं। सावन के तीसरे सोमवार को विशेष भीड़ की संभावना को देखते हुए प्रशासन भी सुरक्षा और यातायात व्यवस्था की तैयारियों में जुट जाता है। विशेष रूप से श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार और महाशिवरात्रि पर यहां लाखों शिवभक्त भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित प्राचीन शिवलिंग है, जिसके बारे में श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यह दिन में तीन अलग-अलग पहरों में अपना रंग बदलता है, जो इस शिवधाम को रहस्यमयी और अद्वितीय बनाता है। स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लंकाधिपति रावण भगवान शिव के अनन्य भक्त थे। कहा जाता है कि भगवान आशुतोष से शिवलिंग प्राप्त करने के बाद जब वह उसे लेकर लंका जा रहे थे, तभी इस स्थान पर किसी कारणवश उन्हें शिवलिंग को भूमि पर रखना पड़ा। एक बार धरती पर स्थापित होने के बाद शिवलिंग वहीं स्थिर हो गया और फिर उसे उठाया नहीं जा सका। कालांतर में यही स्थान कुंडेश्वर महादेव धाम के रूप में प्रसिद्ध हुआ। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यह शिवलिंग स्वयं भगवान शिव की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक है। मंदिर में स्थापित एकमुखी शिवलिंग की आकृति भी अत्यंत विलक्षण मानी जाती है। शिवलिंग के मस्तक पर जटाजूट का स्वरूप दिखाई देता है तथा गोलाकार खुली आंखों जैसी प्राकृतिक आकृति भक्तों को सहज ही आकर्षित करती है। शिवलिंग के विषमुख के मध्य भाग में “ॐ” का चिह्न भी स्पष्ट दिखाई देता है, जिसे श्रद्धालु अत्यंत पवित्र मानते हैं। कुंडेश्वर महादेव मंदिर की सबसे चर्चित विशेषता यह है कि स्थानीय श्रद्धालुओं और पुजारियों के अनुसार शिवलिंग सुबह, दोपहर और सायंकाल तीन अलग-अलग रंगों में दिखाई देता है। इस अद्भुत परिवर्तन को भक्त भगवान शिव की दिव्य लीला मानते हैं। वर्षों से यह रहस्य श्रद्धालुओं की आस्था और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जिसके दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं। कुंडेश्वर महादेव मंदिर आज केवल एक प्राचीन शिवालय नहीं, बल्कि फतेहपुर की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का जीवंत प्रतीक है। यहां की पौराणिक मान्यताएं, रहस्यमयी शिवलिंग, प्राकृतिक महत्व और भक्तों की अटूट आस्था इस सिद्धपीठ को विशेष पहचान प्रदान करती हैं।
नागदेव के दर्शन की भी प्रचलित है मान्यता
मंदिर से जुड़ी एक अन्य प्राचीन जनश्रुति भी श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित है। मान्यता है कि प्रतिदिन एक दिव्य नाग इस शिवलिंग के दर्शन और पूजा के लिए आता है। बुजुर्गों के अनुसार अतीत में जिसने भी उस नागदेव के दिव्य स्वरूप को देखने का प्रयास किया, वह जीवित नहीं रह सका। यद्यपि यह लोकमान्यता है, लेकिन आज भी श्रद्धालु इसे भगवान शिव के नागस्वरूप से जोड़कर श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हैं।
रुद्रवंती औषधि से जुड़ा है धाम का प्राकृतिक महत्व
कुंडेश्वर महादेव मंदिर के निकट स्थित प्राचीन झील भी अपने आप में विशेष महत्व रखती है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां रुद्रवंती नामक दुर्लभ औषधीय वनस्पति पाई जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के मौसम में सूर्योदय से पहले यह औषधि दिखाई देती है और धूप निकलते ही भूमि की दरारों में विलीन हो जाती है। इस दुर्लभ वनस्पति की खोज में दूर-दूर से वैद्य और जड़ी-बूटी विशेषज्ञ यहां पहुंचते रहे हैं। धार्मिक दृष्टि से इसे भगवान शिव का वरदान माना जाता है।
भोलेनाथ की कृपा से पूरी होती हैं मनोकामनाएं
मंदिर से जुड़े लोग बताते हैं कि कुंडेश्वर महादेव धाम में सच्चे मन और अटूट श्रद्धा के साथ आने वाले भक्त कभी निराश नहीं लौटते। उनका कहना है कि भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों की मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण करते हैं। यही कारण है कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं और सावन के महीने में यह धाम पूरी तरह शिवभक्ति के रंग में रंग जाता है।







