Home आस्था संस्कारों मे कर्म योग का आधार ही है रामराज्य : अशोक पाठक

संस्कारों मे कर्म योग का आधार ही है रामराज्य : अशोक पाठक

च्छी बातों को सुनकर संवाद करने से लोक कल्याणकारी प्रवृत्ति का होता है विकास होता : डा योगेन्द्र सिंह
गीता ज्ञान यज्ञ” कार्यक्रम के तहत गीता के कर्मयोग विज्ञान पर हुआ व्याख्यान

प्रयागराज। सनातन एकता मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार पाठक ने आज केपी इंटर कॉलेज मे “गीता ज्ञान यज्ञ” कार्यक्रम के अन्तर्गत गीता के कर्मयोग विज्ञान पर व्याख्यान देते हुए कहा कि गीता के कर्म योग से उत्तम व्यक्तित्व का निर्माण और श्रेष्ठ नागरिक व युवाओं से श्रेष्ठ राष्ट्र‌ का निर्माण होता है। उन्होंने कहा कि यथेष्ट परिणाम प्राप्त करने के लिए कर्मयोग का अवलम्ब लेना चाहिए। गीता में कहा है कि “योग: कर्मसु कौशलम” अथति कर्म की कुशलता ही योग है, यह भारतीय प्रशासनिक सेवा आई ए एस का सूत्र वाक्य भी प्रयागराज l इसलिए अभीष्ट परिणाम प्राप्त करने के लिए कर्म में श्रेष्ठता, कुशलता और योग्यता आवश्यक है। उन्होने बताया कि कर्म तीन प्रकार के होते है, कर्म, अकर्म और विकर्म l इनका निर्धारण लौकिक रीति से सम्भव नहीं होता। यह शास्त्र बताता है कि क्या कर्म है, क्या अकर्म है और क्या विकर्म है।
सनातन एकता मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार पाठक ने कहा कि जो कर्म करने योग्य है और शास्त्र वैसा करने की अनुमति देते हैं, वह कर्म है। जिस कर्म को शास्त्र वर्जित करते हैं वह अकर्म हैं, जैसे मदिरापान करना अकर्म है, और जो कर्म विहित के प्रतिकूल होते है और प्रायः अपराध की श्रेणी में आते हैं वह विकर्म हैं। उन्होने कहा कि व्यक्ति को कर्म, अकर्म और विकर्म तीनो का ज्ञान होना चाहिए। संयमित और संतुलित कर्मो से सदाचरण और सदाचरण से उत्तम चरित्र तथा उत्तम चरित्र से उत्तम समाज और उत्तम समाज से उत्तम राष्ट्र का निर्माण होता है। गीता “सर्व भूत हिते रताः” की शिक्षा देती है जब व्यक्ति सबके कल्याण की कामना के साथ अपने कर्मो का सम्यक निर्वाहन करता है तो अपराध मुक्त और न्याय युक्त समाज का निर्माण होता है।
सनातन सनातन एकता मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार पाठक ने कहा कि कर्मयोग आत्मकल्याण के साथ साथ लोक कल्याण का मार्ग है। मात्रात्मक वृद्धि को विकास कहते है, जब उसमे नैतिकता जुड़ जाती है तो वही उन्नति बन जाती है और यदि मानवता भी जुड़ जाय तो वही सफ़लता कहलाती है, इसलिए सफल जीवन के लिए आवश्यक है कि विकास नैतिकता और मानवता के साथ हो। उन्होंने कहा कि यदि संस्कार युक्त समाज मे कर्मयोग का आधान हो जाय तो रामराज्य का प्राकट्य सम्भव है l संस्कारों मे कर्म योग का आधान ही रामराज्य है l
विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ योगेन्द्र सिंह ने कहा कि अच्छी बातों को सुनने से संवाद करने से मन की पवित्रता और लोक कल्याणकारी प्रवृत्ति का विकास होता है, जो कि युवाओं के लिए अत्यन्त आवश्यक है। इस अवसर पर केपी इण्टर कालेज के वरिष्ठ प्रवक्ता दिनेश श्रीवास्तव सुदीप कुमार, राकेश कुमार आर पी मौर्य, ओपी सिंह नितिन पटेल, सोनी श्रीवास्तव आदि शिक्षक, कर्मचारी उपस्थित थे जबकि कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ शिक्षक उमेश खरे ने किया।