किसानों व छात्र-छात्राओं को दी गई मृदा परीक्षण, जैविक खेती एवं संसाधन संरक्षण की जानकारी
FATEHPUR NEWS: विश्व मृदा दिवस के अवसर पर शुक्रवार को कृषि भवन में कृषि विभाग की ओर से प्रातः 11:00 बजे से विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों एवं विद्यार्थियों को मृदा स्वास्थ्य, मृदा परीक्षण, उर्वरक प्रबंधन, जैविक एवं प्राकृतिक खेती की तकनीकों से अवगत कराना रहा। कार्यक्रम में तकनीकी सत्र की शुरुआत डॉ. प्रेमदान सिंह पाल द्वारा की गई। उन्होंने खेतों में जीवांश कार्बन की कमी को चिंता का विषय बताते हुए इसके सुधार हेतु कार्बनिक खाद, कम्पोस्ट, केंचुआ खाद एवं हरी खाद के उपयोग पर बल दिया। उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से मृदा नमूना लेने एवं मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन की विस्तृत जानकारी भी प्रदान की। केवीके वैज्ञानिक डॉ. जगदीश किशोर ने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाए बिना खेत की उपजाऊ क्षमता में सुधार संभव नहीं। फसल अवशेषों का खेतों में उपयोग करने से जीवांश व कार्बन की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने किसानों से नियमित मृदा परीक्षण कराने की अपील की। प्रगतिशील किसान बजरंग सिंह ने पंक्ति में बुवाई तकनीक के लाभों की जानकारी दी। जिल कृषि अधिकारी ने कहा कि जैविक एवं प्राकृतिक खेती से न केवल मृदा स्वास्थ्य बेहतर होता है बल्कि मनुष्य के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने फसल विविधीकरण एवं संसाधन संरक्षण तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया। बैंक ऑफ बड़ौदा के महाप्रबंधक मनोज कुमार ने किसानों को कृषि ऋण व अन्य वित्तीय योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई। कार्यक्रम में जय मां सरस्वती ज्ञान मंदिर इंटर कॉलेज राधानगर एवं दूजी देवी मेमोरियल इंटर कॉलेज भृगुधाम के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्ण भागीदारी की। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में पूजा देवी प्रथम, धर्मेंद्र कुमार द्वितीय, अश्वनी कुमार तृतीय, दिव्यांश सिंह चतुर्थ व अमन साहू पांचवें स्थान पर रहे। चयनित विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। उप सम्भागीय कृषि प्रसार अधिकारी रंजीत कुमार चौरसिया ने विद्यार्थियों को मृदा नमूना लेने की विधि बताई एवं मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला का भ्रमण कराया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उप कृषि निदेशक ने कहा कि मृदा सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक पूंजी है, इसलिए इसका संरक्षण सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने किसानों से नियमित मृदा परीक्षण, प्राकृतिक खेती एवं जैविक खादों के उपयोग की अपील की। कार्यक्रम में उप कृषि निदेशक, जिला कृषि अधिकारी, भूमि संरक्षण अधिकारी, केवीके के वैज्ञानिक, बैंक प्रतिनिधि, विभिन्न विभागों के अधिकारी, बड़ी संख्या में किसान एवं छात्र-छात्राएँ मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में उप कृषि निदेशक ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।







