PRATAPGARH NEWS: शिक्षक एमएलसी उमेश द्विवेदी ने उत्तर प्रदेश विधान परिषद में सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों की पदोन्नति और स्कूल बसों की परमिट व्यवस्था का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सरकार से आयोग से चयनित शिक्षकों को प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति का अधिकार देने की मांग की। उनका कहना था कि एडेड विद्यालयों में वर्षों से कार्यरत शिक्षक पदोन्नति के अवसर से वंचित हैं, जबकि राजकीय विद्यालयों में यह सुविधा उपलब्ध है। इससे शिक्षकों का मनोबल और सम्मान प्रभावित होता है। सदन में उन्होंने स्कूल बसों के संचालन से जुड़ी समस्याएं भी उठाईं। उन्होंने कहा कि यदि बसें समय-समय पर फिटनेस जांच में सफल हो रही हैं तो केवल आयु सीमा के आधार पर उन्हें संचालन से बाहर करना उचित नहीं है। नई बस खरीदने का अतिरिक्त आर्थिक बोझ अंततः अभिभावकों और छात्रों पर पड़ता है। उमेश द्विवेदी ने स्कूल बसों के लिए परमिट व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ये बसें व्यावसायिक रूट पर नहीं चलतीं, बल्कि सीमित क्षेत्र में बच्चों को लाने-ले जाने का कार्य करती हैं। ऐसे में परमिट के नाम पर अनावश्यक उत्पीड़न बंद होना चाहिए। उन्होंने सरकार से स्पष्ट नीति बनाकर शिक्षा संस्थानों और स्कूल संचालकों को राहत देने की मांग की।







