नगर के आलमपुर के नूरे हेरा मस्जिद में नमाज-ए-तरावीह मुकम्मल
कुरआन में अल्लाह का हुक्म है कि ऐ ईमान वालों तुम्हारे ऊपर रोजे फर्ज किए गए है। ताकि तुम डरने वाले बन जाओं, रोजा का अर्थ है अल्लाह से डरने वाला बनाना। रमजान में ही पैगम्बर हजरत मोहम्मद स. पर कुरआन का अवतरण हुआ था। इस लिए रमजान में विशेष नमाज-ए-तरावीह पढ़ी जाती है।
प्रातःकाल एक्सप्रेस
भदोही। नगर के आलमपुर मोहल्ले में स्थित नूरे हेरा मस्जिद में रमजान के 11वीं शब को विशेष नमाज-ए-तरावीह मुकम्मल हो गई। तरावीह हाफिज इमरान ने मुकम्मल कराई। जहां पर मुक्तदियों ने फूल माला पहनाकर उनका इस्तकबाल किया और गले लगाकर मुबारकबाद दी। हाफिज इरफान ने बारगाहे इलाही में दोनों हाथों को फैलाकर आलम-ए-इस्लाम के लिए दुआएं खैर की।
इस दौरान हाफिज इमरान ने रमजान, इबादत व जकात आदि पर तहरीर की। उन्होंने कहा कि रमजान इस्लामी हिजरी कैलेंडर का नौवा महीना है। हिजरी वर्ष के महीने में यह एकमात्र महीना है जिसका जिक्र कुरआन में है। कुरआन व रमजान का बहुत गहरा संबंध है। पैगम्बर हजरत मोहम्मद स. पर कुरआन का अवतरण रमजान में ही हुआ था। उन्होंने कहा कि कुरआन में अल्लाह का हुक्म है कि ऐ ईमान वालों तुम्हारे ऊपर रोजे फर्ज किए गए है। ताकि तुम डरने वाले बन जाओं, रोजा का अर्थ है अल्लाह से डरने वाला बनाना। रमजान में ही पैगम्बर हजरत मोहम्मद स. पर कुरआन का अवतरण हुआ था। इस लिए रमजान में विशेष नमाज-ए-तरावीह पढ़ी जाती है। इसके साथ ही जकात पर तफ्शिल से बयान किया गया। इस दौरान हाफिज इमरान के साथ मुक्तदियों ने
बारगाहे इलाही में दोनों हाथों को फैलाकर मुल्क में अमनो-अमान कायम रखने और आलम-ए-इस्लाम के लिए दुआएं खैर की गई।
इस मौके पर साजिद हुसैन अंसारी, अहसन अंसारी, हाजी अब्दुल सलाम अंसारी, हाजी साबिर अंसारी, सरफराज अंसारी, हाजी इमरान अंसारी, इरफान अंसारी, अव्वल अंसारी, नईम अंसारी मुन्ना, अब्दुल गफ्फार अंसारी, सदरुद्दीन अंसारी, नसीरुद्दीन अंसारी, इश्तियाक अंसारी गुड्डू, महताब अंसारी, परवेज अंसारी, आलम अंसारी व छोटई अंसारी आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।







