JHANSI NEWS: भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण एवं संविधान सम्मत बनाने की मांग को लेकर यूजीसी एक्ट 2026 को प्रभावी रूप से लागू करने हेतु महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में कहा गया कि प्रस्तावित यूजीसी एक्ट 2026 धर्म, जाति, नस्ल, लिंग अथवा जन्म स्थान के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधारात्मक कदम है। ज्ञापन में उच्च शिक्षण संस्थानों में हुई दुखद घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा गया कि रोहित वेमुला, डॉ. पायल तडवी तथा दर्शन सोलंकी जैसी घटनाएं शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं। मांग की गई कि भविष्य में कोई भी छात्र ऐसी परिस्थितियों का शिकार न हो, इसके लिए ठोस कानूनी व्यवस्था लागू की जाए। ज्ञापन में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में हाल के वर्षों में 27 से 30 छात्रों की आत्महत्या के मामले सामने आए हैं, जिनमें आईआईटी कानपुर से सर्वाधिक घटनाएं दर्ज की गईं। हाल ही में आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी कानपुर में भी आत्महत्या की घटनाएं सामने आने की बात कही गई। राज्यसभा में प्रस्तुत सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018 से 2023 के बीच उच्च शिक्षण संस्थानों में 98 आत्महत्याओं के मामले दर्ज हुए, जिनमें 39 आईआईटी, 25 एनआईटी और 25 केंद्रीय विश्वविद्यालयों से संबंधित थे। वहीं राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के 2023 के आंकड़ों के अनुसार देशभर में छात्रों की आत्महत्या के 13,892 मामले दर्ज किए गए। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि कई मामलों में रिपोर्टिंग की कमी अथवा गलत वर्गीकरण के कारण वास्तविक संख्या सामने नहीं आ पाती। इसमें अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों का प्रतिशत अधिक बताया गया है। अंत में राष्ट्रपति से मांग की गई कि उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव एवं हिंसा समाप्त करने तथा छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यूजीसी एक्ट 2026 को प्रभावी रूप से लागू कराया जाए। इस अवसर पर अपनी जनता पार्टी के मण्डल अध्यक्ष बुद्ध सिंह कुशवाहा, जिलाध्यक्ष महेश शंकर, विधानसभा अध्यक्ष झांसी एड सर्वेश कुमार गौतम, वरिष्ठ नेता भगवत नारायण कांछी, जिला महासचिव मुकेश कुशवाहा, उमेश पाल, महेश कुशवाहा चितगुवां, जयराम कुशवाहा, हरीशंकर सहित आदि उपस्थित रहें।







