Home उत्तर प्रदेश माहे-रमज़ान: रहमतों का नुज़ूल और इबादत का पैगाम

माहे-रमज़ान: रहमतों का नुज़ूल और इबादत का पैगाम

माहे-रमज़ान का आगाज़: इबादत, सब्र और रहमतों का मुकद्दस महीना शुरू

FATEHPUR NEWS: (सैय्यद शारिब क़मर अज़मी) इस्लाम का सबसे पाक और मुकद्दस महीना रमज़ान शुरू हो चुका है। शाबान की रुखसती के बाद रमज़ान का आगाज़ हुआ है, जिसमें मुसलमान पूरे एक महीने तक रोज़ा, नमाज़ और ज़कात के ज़रिए इबादत करते हुए अपनी आख़िरत की तैयारी करते हैं। रमज़ान को सब्र, संयम और आत्मशुद्धि का महीना माना जाता है। जामा मस्जिद के पेश इमाम शहीद रज़ा ने बताया कि रमज़ान सब्र, इबादत और रहमतों का महीना है। उन्होंने कहा कि इस पाक महीने में अल्लाह की इबादत करने से गुनाहों की माफी मिलती है और इंसान का रूहानी तौर पर विकास होता है। रमज़ान इंसान को बुराइयों से दूर रहकर नेक रास्ते पर चलने की सीख देता है। वहीं मोहल्ला अरबपुर स्थित मस्जिद के पेश इमाम हाफिज मोहम्मद जुबैर ने बताया कि रमज़ान के आगाज़ के साथ ही मस्जिदों में रौनक बढ़ गई है। लोग पांच वक्त की नमाज़ के साथ-साथ तरावीह की नमाज़ के लिए भी बड़ी संख्या में मस्जिदों में पहुंच रहे हैं। मस्जिदों में देर रात तक इबादत का माहौल बना रहता है और कुरआन की तिलावत की जा रही है।
बाज़ारों में इस्तकबाल की तैयारी
रमज़ान के स्वागत को लेकर शहर के बाज़ारों में भी खास चहल-पहल देखने को मिल रही है। लोग इफ्तार और सेहरी के लिए खजूर, फल, सेवइयां, दूध, शरबत और अन्य जरूरी सामान की खरीदारी कर रहे हैं। दुकानों पर रोज़ा रखने वालों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।
रहमतों का नुज़ूल
रमज़ान का महीना रहमतों के नुज़ूल का महीना माना जाता है। इस दौरान अल्लाह की रहमतें बरसती हैं और बंदों की दुआएं कबूल होती हैं। लोग ज्यादा से ज्यादा इबादत कर अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं और नेक कामों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
इबादत का पैगाम
रमज़ान इबादत, त्याग और नेकियों का पैगाम देता है। इस महीने में रोज़ा रखकर, नमाज़ अदा कर और ज़कात व सदक़ा देकर लोग न सिर्फ खुद को बेहतर इंसान बनाने की कोशिश करते हैं, बल्कि समाज में भाईचारे, सहयोग और इंसानियत का भी संदेश देते हैं। रमज़ान का मकसद इंसान को आत्मसंयम, सेवा और सद्भाव की राह पर चलने की प्रेरणा देना है।