अधिवक्ताओं ने राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन
FATEHPUR NEWS: बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के बी.एड. प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रम में भारतीयों को कथित रूप से ‘मंदबुद्धि’ एवं तर्कपूर्ण निर्णय लेने में अयोग्य बताने वाली सामग्री शामिल किए जाने के विरोध में खागा के अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन कर राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी अभिनीत कुमार को सौंपा। अधिवक्ताओं ने इसे देश और भारतीय समाज का अपमान बताते हुए संबंधित लेखक, प्रकाशक एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि भारत आज विश्व पटल पर अपनी प्रतिभा, ज्ञान, विज्ञान और तकनीकी क्षमता के बल पर नई पहचान बना रहा है। दुनिया के अनेक विकसित देशों में भारतीय मूल के लोग महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। ऐसे में किसी शैक्षणिक पुस्तक में भारतीयों की मानसिक क्षमता पर सवाल उठाने वाली सामग्री का शामिल होना न केवल आपत्तिजनक है, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अधिवक्ताओं ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि 2 जून 2026 को प्रकाशित एक समाचार के अनुसार संबंधित पुस्तक में भारतीयों को निर्णय लेने में अयोग्य तथा मानसिक रूप से कमजोर बताया गया है। इस कथित सामग्री को लेकर अधिवक्ताओं और स्थानीय नागरिकों में व्यापक नाराजगी है। उनका कहना है कि इस प्रकार की सामग्री छात्रों के मन में अपने देश और समाज के प्रति नकारात्मक सोच विकसित कर सकती है। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि विवादित लेख की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने पर लेखक और प्रकाशक के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया जाए। साथ ही ऐसी सामग्री को पाठ्यक्रम में शामिल करने वाले विश्वविद्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की जाए। अधिवक्ताओं ने यह भी मांग उठाई कि दोषी व्यक्तियों से 10 करोड़ रुपये का हर्जाना वसूला जाए और उक्त धनराशि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की शिक्षा एवं कल्याण पर खर्च की जाए। इस अवसर पर रामसखा द्विवेदी, इसराइल फारुकी, यूसुफ सिद्दीकी, शहज़ादुल हसन, अखिलेश यादव, अनूप कौशल, योगेश त्रिपाठी, दुर्गेश अवस्थी, नीतू जायसवाल, राजेश द्विवेदी, श्याम कुमार गुप्ता, अंशुमान शुक्ला, अरविंद पांडेय, कृष्णा तिवारी, अभिषेक, ब्रजेश शुक्ला, गुड्डू मिश्रा, हेमराज शर्मा, शिव सिंह पप्पू, आशीष लोधी उर्फ सारंग, रजोल यादव, दीपक तिवारी सहित बड़ी संख्या में अधिवक्तागण एवं जागरूक नागरिक उपस्थित रहे।







