Home आस्था भगवान की उपासना पवित्र मन से हुआ करती है फलीभूत:आचार्य शक्तिधरनाथ

भगवान की उपासना पवित्र मन से हुआ करती है फलीभूत:आचार्य शक्तिधरनाथ

PRATAPGARH NEWS: बाबा बूढ़ेश्वरनाथ धाम के निकट तिना गेट के समीप हो रही श्रीमदभागवत कथा में शुक्रवार को श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी दिखी। कथाव्यास आचार्य डॉ0 शक्तिधरनाथ पाण्डेय ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला का मनमोहक वर्णन किया। उन्होने कहा कि भगवान का जन्म जगत के कल्याण का मांगलिक प्रतीक है। उन्होने कहा कि भगवान की उपासना सदैव मन की पवित्रता से करनी चाहिए। उन्होने कहा कि एकाग्र मन ही प्रभु के स्मरण से जीवन के सुमंगल को मजबूत बनाया करता है। उन्होने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का दर्शन अनीति व अत्याचार के विरूद्ध मानव सभ्यता को सदैव संघर्ष का बोध कराया करती है। उन्होने श्रद्धालुओं से कहा कि भगवान सर्वत्र एवं सदैव विद्यमान रहकर पल पल के कर्मो का आकलन किया करते हैं। उन्होने कहा कि कर्म ही मनुष्य के सुख व दुख का कारक है। आचार्य शक्तिधरनाथ ने बताया कि श्रीमदभागवत कथा के सुनने से आध्यात्म का ज्ञान निखरने के साथ जीवन को सदमार्ग प्रदान करने का सुख दिया करता है। कथा के दौरान भक्तिमय भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा की संयोजिका कुसुमलता श्रीवास्तवा व ज्ञानेश श्रीवास्तव ने व्यासपीठ का पूजन अर्चन किया। इस मौके पर पूर्व प्राचार्य डॉ0 श्यामदुलारी सिंह, महेन्द्र पाल, ऐश्वर्य त्रिपाठी, मुदित पाण्डेय, विशम्भरनाथ त्रिपाठी, मृत्युंजय पाण्डेय, अजेन्द्र सिंह, शिवम मिश्र आदि रहे।