Home उत्तर प्रदेश बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा हुआ तार-तार

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा हुआ तार-तार

चार नाबालिग बच्चियों की अस्मिता पर हमला, दबंगों की हैवानियत के बाद पीड़ित परिवार पर ही मुकदमा

PRAYAGRAJ NEWS: मुख्यमंत्री योगी आदित्यना की सरकार में महिलाओं की सुरक्षा और “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे नारों की हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। थाना सोरांव क्षेत्र के ग्राम असवा हाजीगंज में जो कुछ हुआ, उसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया। आरोप है कि जमीन पर अवैध कब्जे का विरोध करने पर दबंगों ने एक ही परिवार पर योजनाबद्ध तरीके से जानलेवा हमला बोल दिया। धारदार हथियार, लोहे की रॉड और लाठी-डंडों से लैस दर्जनों हमलावरों ने महिलाओं, बुजुर्गों और चार नाबालिग बच्चियों को बेरहमी से पीटा। चीखती-चिल्लाती बच्चियों के कपड़े फाड़ दिए गए और उनकी अस्मिता को सरेआम रौंदने का प्रयास किया गया। इस हमले में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पीड़ित परिवार का आरोप है कि न्याय की उम्मीद लेकर जब वे थाने पहुंचे, तो उन्हें मदद देने के बजाय अपमानित किया गया। पहले तहरीर लेने से इनकार किया गया, फिर दबाव बनाकर दूसरी तहरीर लिखवाई गई और गंभीर अपराधों को हल्की धाराओं में दर्ज कर दिया गया। सबसे गंभीर आरोप यह है कि पीड़ित पक्ष पर ही क्रॉस मुकदमा दर्ज कर दिया गया, जिससे न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए।‌ जनहित संकल्प पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आर. एस. पटेल के अनुसार, थाना प्रभारी केशव वर्मा ने स्वीकार किया कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर क्रॉस मुकदमा दर्ज किया गया। एक ओर सरकार अपराधियों और माफियाओं पर बुलडोजर कार्रवाई की बात करती है, दूसरी ओर मासूम बच्चियों पर हमला करने वाले खुलेआम घूम रहे हैं। इससे स्थानीय लोगों में भारी रोष है। मामले की जानकारी मिलते ही सरदार सेना के हजारों कार्यकर्ता पीड़ित परिवार के समर्थन में पहुंच गए। जनदबाव बढ़ने पर प्रशासन में हड़कंप मच गया और एसीपी श्यामजीत भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। सरदार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने प्रशासन के समक्ष सात मांगें रखीं—‌ नाबालिग बच्चियों पर दर्ज फर्जी मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर गंभीर धाराएं बढ़ाई जाएं। विवादित भूमि पर आरोपियों द्वारा रखी गई सामग्री तत्काल हटाई जाए।‌ पीड़ित परिवार को सुरक्षा दी जाए। बच्चियों के साथ हुए दुर्व्यवहार पर अलग मुकदमा दर्ज किया जाए। सभी आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए। जांच में लीपापोती करने वाले अधिकारी को तुरंत हटाया जाए। प्रशासन ने इनमें से चार मांगों को तत्काल स्वीकार कर लिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या मासूम बच्चियों की चीखें न्यायालय और प्रशासन तक पूरी ताकत से पहुंचेंगी, या दबंगों का आतंक और सत्ता-संरक्षण एक बार फिर न्याय का गला घोंट देगा?