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बलापुर-गोगांव चौपाल में समस्याओं का अंबार, फसल बर्बादी का मुआवजा न मिलने पर किसानों में आक्रोश

MIRZAPUR NEWS: (सुनील कुमार गुप्ता) क्षेत्र के बलापुर और गोगांव गांवों में शुक्रवार को पंचायत भवनों पर आयोजित ‘गांव की समस्या–गांव में समाधान’ चौपाल में ग्रामीणों ने विभिन्न समस्याओं को लेकर जमकर नाराजगी जताई। दोनों गांवों में नोडल अधिकारी अनुपस्थित रहे। अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों की गैरमौजूदगी से ग्रामीणों में आक्रोश साफ देखा गया।

बलापुर में बाढ़ से फसल बर्बाद, आकलन के लिए नहीं पहुंचे राजस्व कर्मी

बलापुर गांव में किसान नंदलाल पाल, बाबा राम, तेरसू, शिवलाल, परमेश्वर आदि ने बताया कि कर्णावती नदी में आई बाढ़ के पानी में डूबने से उनकी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। किसानों का कहना था कि फसल क्षति के मुआवजे की बात तो दूर, अभी तक राजस्व विभाग की ओर से नुकसान का आकलन करने के लिए गांव में कोई कर्मचारी नहीं पहुंचा। चौपाल में लेखपाल के मौजूद नहीं रहने पर भी किसानों ने नाराजगी जताई। सेक्रेटरी धनंजय बिंद ने प्रभावित किसानों की समस्याएं सुनकर उनके नाम सूचीबद्ध किए और जल्द समाधान का भरोसा देकर किसानों को शांत कराया। चौपाल में एडीओ कृषि, सहकारिता एवं ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारी भी मौजूद नहीं रहे। ग्राम प्रशासक पप्पू पाल ने बताया कि सूचना दिए जाने के बावजूद प्रसाविका, आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी चौपाल में नहीं पहुंचीं। इससे ग्रामीणों को अपनी समस्याएं संबंधित विभागों के समक्ष रखने का मौका नहीं मिल सका।

गोगांव में विकास कार्यों की धीमी गति और हंगामा

गोगांव में एडीओ सी की उपस्थिति में चौपाल आयोजित हुई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रशासक और सेक्रेटरी के बीच समन्वय की कमी के कारण गांव के विकास कार्य धीमी गति से हो रहे हैं। ग्राम प्रशासक सिया दुलारी चौपाल में उपस्थित नहीं थीं। उनकी अनुपस्थिति में उनके पति एवं पारिवारिक सदस्यों के कथित हस्तक्षेप को लेकर ग्रामीणों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। इस मुद्दे पर ग्रामीणों और ग्राम प्रशासक के पारिवारिक सदस्यों के बीच नोक-झोंक शुरू हो गई। विवाद बढ़ने से चौपाल में हंगामे की स्थिति बन गई और बैठक प्रभावित हुई। सेक्रेटरी अमर बहादुर सिंह ने ग्रामीणों एवं शिकायतकर्ताओं की समस्याओं को अपने रजिस्टर में सूचीबद्ध किया। ग्रामीणों ने विकास कार्यों में तेजी लाने और अधिकारियों-कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की मांग की। गोगांव में भी नोडल अधिकारी अनुपस्थित रहे।