Home उत्तर प्रदेश बंटवारे से पछताये थे जिन्ना: उमादत्त मिश्रा

बंटवारे से पछताये थे जिन्ना: उमादत्त मिश्रा

उमादत्त मिश्रा सर्वोदय इंटर कॉलेज के प्रबंधक
MIRZAPUR NEWS: (अमरेश चन्द्र पांडेय) भारत का विभाजन 15 अगस्त 1947 को हुआ था। भारत और पाकिस्तान दो देश संसार के मानचित्र पर और उभर आये। इसमें कोई संदेह नहीं कि नवनिर्मित राष्ट्र बनाने में मुहम्मद अली जिन्ना का पूरा सहयोग था, किन्तु जिन्ना का अन्तिम समय काफी दुखमय था। वे कैंसर के रोगी थे और दिमागी रूप से अवसाद से व्याकुल भी थे। वे अपने राजनैतिक सहयोगी नवाब जादा लियाकत अली खां के चलते वेहद दुखी थे। यह कहना है, सर्वोदय इण्टर कालेज के प्रबन्धक उमादत्त मिश्रा का। उन्होंने बताया कि जिन्ना को नये राष्ट्र का गवर्नर जनरल बनाया गया, किन्तु वे अधिक दिन तक पद को नहीं भोग सके और कुछ दिन तक निर्वासित जीवन व्यतीत करने के बाद 11 सितम्बर 1948 को, वे खुदा को प्यारे हो गये। दरअसल काग्रेंस से उनकी बनी नहीं, और सत्ता सुख भोगने के चक्कर में मुस्लिम लीग ने भी उनसे किनारा कस लिया और काफी समय तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति ने कहीं उनका जिक्र तक नहीं किया। मिश्रा ने बताया कि जिन्ना के अन्तिम समय कितने दुखमय व दयनीय थे, इसका उल्लेख जिन्ना के निजी डाक्टर इलाही बक्स ने अपनी पुस्तक में किया है। वे लिखते हैं कि जिन्ना को शारीरिक कष्ट और रोग की पीड़ा तो थी ही, किन्तु इससे कहीं अधिक पीड़ा उन्हें उन लोगों से थी, जिन्हें उन्होने नया देश लेकर दिया था। विशेषकर उन्हें अधिक पीड़ा, प्रथम प्रधानमंत्री नवाबजादा लियाकत अली खां से थी। जब जिन्ना बीमार पड़े तो उन्हें एक पहाड़ी स्थान पर भेज दिया गया और कर्नल डा. इलाहीबक्स को उनके देखभाल के लिये नियुक्त कर दिया गया। डा. इलाहीबक्स  अपनी पुस्तक में कहते हैं कि-एक दिन जिन्ना ने, बड़ी गम्भीरता से कहा, पाकिस्तान बनाकर मैंने अपने जीवन की सबसे बड़ी भूल की है। अब यह सम्भव होता तो मैं इसी समय दिल्ली जाकर जवाहर लाल से कहता पुरानी अदावतों और तलखियों को भूल जाओ, और एक बार फिर इकट्ठे हो जाओ। डा. इलाहीवक्स ने यह सब कुछ सीमाप्रांत भूतपूर्व शिक्षामंत्री मुहम्मद यकी खां को बताया, जिन्होंने इसे एक लेख में लिखकर प्रकाशित करा दिया। मिश्रा ने बताया कि एक राष्ट्रपिता की मौत दवाईयों के अभाव में किस तरह हुई यह सोचने पर मजबूर कर देगी।