PRAYAGRAJ NEWS: इलाहाबाद उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने प्रदेश के निजी विद्यालयों की मनमानी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। एसोसिएशन ने पुस्तकों की बढ़ती कीमतों और हर वर्ष किए जा रहे अनावश्यक बदलावों को गंभीर मुद्दा बताते हुए मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि अधिकांश निजी विद्यालय अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाल रहे हैं। स्कूल प्रबंधन पुस्तकों की कीमतों को मनमाने तरीके से बढ़ा रहे हैं और अभिभावकों को केवल निर्धारित दुकानों से ही किताबें खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है। इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा खत्म हो जाती है और अभिभावकों को अधिक कीमत चुकानी पड़ती है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई विद्यालय हर वर्ष पुस्तकों का नया संस्करण जारी कर देते हैं, जबकि पाठ्यक्रम में कोई विशेष बदलाव नहीं होता। केवल कुछ अध्यायों में मामूली परिवर्तन करके नई किताबें अनिवार्य कर दी जाती हैं, जिससे हर साल अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
बार एसोसिएशन ने इसे अभिभावकों के साथ अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि अधिकांश परिवार हर वर्ष इस अतिरिक्त खर्च को वहन करने में सक्षम नहीं हैं। इस मुद्दे के सामने आने के बाद अभिभावकों में उम्मीद जगी है कि सरकार जल्द ही ठोस कदम उठाएगी और उन्हें राहत मिलेगी।
मुख्यमंत्री से की गई प्रमुख मांगें
ऽ निजी विद्यालयों द्वारा पुस्तकों की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सख्त नियम बनाए जाएं।
ऽ किसी विशेष विक्रेता से ही पुस्तकें खरीदने के दबाव पर रोक लगाई जाए।
ऽ पुस्तकों के सेट को कम से कम 5 वर्षों तक अपरिवर्तित रखने का नियम लागू किया जाए।
ऽ केवल आंशिक बदलाव के आधार पर नई किताबें अनिवार्य करने की प्रथा समाप्त की जाए।
ऽ नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
ऽ अभिभावकों के हितों की सुरक्षा के लिए प्रभावी मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया जाए।







