Home आस्था प्रभु दर्शन कर नेत्रों की सार्थकता बढायें :विशाश्री माताजी

प्रभु दर्शन कर नेत्रों की सार्थकता बढायें :विशाश्री माताजी

JHANSI NEWS: अतिशय क्षेत्र करगुवांजी में चल रहे 48 दिवसीय 1008 भक्तामर महा मण्डल आराधना विधान के पंद्रहवें दिन मंगलवार को गणिनी आर्यिका 105 विशाश्री माताजी ने मंगल देशना देते हुए कहा कि भगवान के दर्शन करने से नेत्र सफल होते हैं, हरि चर्चा सुनने से कान और स्वयं भगवान के गुणों का वर्णन करने से वाणी पवित्र होती है। अतः मनुष्य  को प्रतिदिन मंदिर जाकर अपने नेत्र, कान और वाणी की सार्थकता को सबल बनाना चाहिए।भगवान की सुंदरता का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान इतने सुन्दर हैं कि उन्हें देखने के बाद संसार की किसी और वस्तुओं को देखने का मन ही नहीं करता ठीक उसी प्रकार कि एक बार जो क्षीर सागर के  अमृत मयी जल का पान कर लेता है वह कभी समुद्र के खारे पानी को पीना पसंद ही नहीं  करता।पंद्रहवें दिवस मंगलवार के पुण्यार्जक श्रीमती सुनीता राजीव जैन शिवाजी,रितिक जैन, राशि, श्रेय एवं कमल जैन शिवाजी परिवार झांसी एवं श्रीमती अनीता प्रवीण  जैन, अरिहंत, सिद्धि जैन, श्रषभ, वेदिका एवं समस्त बड़जात्या परिवार फुलेरा वाले जयपुर रहे,जिन्होंने शांतिधारा का सौभाग्य प्राप्त किया एवं माताजी को शास्त्र भेंटकर  समस्त धार्मिक क्रियायें सम्पन्न कराते हुए अर्घ समर्पित किये। संचालन दिगम्बर जैन पंचायत समिति के महामंत्री कमल जैन एवं करगुवांजी मंत्री शिरोमणि जैन ने किया।अंत में बाहुबलि जैन ने सभी का आभार व्यक्त किया।इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य, इं बालचंद्र जैन, चौधरी जितेंद्र जैन तालबेहट, प्रीति शिरोमणि जैन, रानी भागचंद जैन, सरोज जैन,अनिता जैन, रवींद्र जैन रेल्वे सहित अनेकों श्रद्धालु मौजूद रहे।