PRATAPGARH NEWS: प्रतापगढ़ जिले में पाकिस्तानी साइबर अपराधियों की सक्रियता ने स्थानीय निवासियों में दहशत पैदा कर दी है। ये अपराधी डिजिटल अरेस्ट और पुलिस अधिकारी बनकर फोन कॉल के जरिए ठगी करने की कोशिश कर रहे हैं। जिले के लोगों को सतर्क रहने और इस तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। बुधवार, 20 अगस्त 2025 की सुबह ऐसी ही एक घटना सामने आई, जब रानीगंज थाना क्षेत्र के खाखापुर गांव निवासी विजयकांत पांडेय को एक संदिग्ध कॉल प्राप्त हुआ। इस घटना ने साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को उजागर किया है।सुबह करीब 10 बजे विजयकांत पांडेय के मोबाइल नंबर 9452117199 पर +923062176133 से एक कॉल आई। इस नंबर का देश कोड +92 पाकिस्तान का है, जो स्पष्ट करता है कि कॉल करने वाला पाकिस्तान से था। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए धमकी भरे लहजे में कहा, आपका बेटा अरेस्ट हो गया है। अब बताइए, क्या करना है? उसे छुड़ाना चाहते हैं या बड़े साहब के पास भेज दूं? विजयकांत, जो पहले से ही इस तरह की ठगी की खबरों से वाकिफ थे, ने तुरंत स्थिति को भांप लिया। उन्होंने जवाब दिया, बड़े साहब के पास भेज दो। इसके तुरंत बाद कॉल काट दी गई। हैरानी की बात यह थी कि कॉल कटते ही वह नंबर विजयकांत के मोबाइल से स्वतः डिलीट हो गया। सौभाग्य से, विजयकांत ने कॉल के दौरान स्क्रीनशॉट ले लिया था, जिसमें कॉलर की डिस्प्ले पिक्चर (डीपी) पर पुलिस की वर्दी में एक व्यक्ति की तस्वीर दिखाई दे रही थी। यह घटना कोई इकलौती नहीं है। हाल के महीनों में प्रतापगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में ऐसी कई शिकायतें सामने आई हैं, जहां साइबर ठग विदेशी नंबरों से कॉल करके लोगों को डराने और पैसे ऐंठने की कोशिश कर रहे हैं। ये अपराधी आमतौर पर डिजिटल अरेस्ट, मनी लॉन्ड्रिंग, या किसी परिजन के गिरफ्तार होने जैसे झूठे दावे करके लोगों को भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये कॉल्स वॉट्सऐप या अन्य इंटरनेट-आधारित प्लेटफॉर्म्स के जरिए की जाती हैं, जिससे नंबर को ट्रेस करना मुश्किल हो जाता है। इस मामले में भी कॉलर ने नंबर को तुरंत डिलीट होने की तकनीक का इस्तेमाल किया, जो साइबर अपराधियों की उन्नत तकनीकी जानकारी को दर्शाता है। विजयकांत पांडेय की सतर्कता ने उन्हें इस ठगी का शिकार होने से बचा लिया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अनजान नंबरों से आने वाली कॉल्स पर भरोसा न करें और तुरंत पुलिस को सूचित करें। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की ठगी से बचने के लिए लोगों को चाहिए कि वे अपने निजी और बैंकिंग विवरण किसी के साथ साझा न करें। साथ ही, ऐसी कॉल्स का स्क्रीनशॉट या रिकॉर्डिंग रखना भी महत्वपूर्ण है। स्थानीय सामाजिक संगठनों और पुलिस ने जागरूकता अभियान चलाने की योजना बनाई है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग इस तरह की ठगी से सावधान रहें। खास तौर पर बुजुर्ग और कम तकनीकी जानकारी रखने वाले लोग इन ठगों का आसान शिकार बन रहे हैं। पुलिस ने सुझाव दिया कि यदि कोई संदिग्ध कॉल आए, तो तुरंत नजदीकी थाने या साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें। यह घटना प्रतापगढ़ में साइबर अपराध के बढ़ते खतरे की ओर इशारा करती है। पाकिस्तानी नंबरों से आने वाली कॉल्स ने न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन और नागरिकों को मिलकर इस खतरे से निपटने की जरूरत है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।







