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पेड़ कटान नियमों पर किसानों का आक्रोश, एसएसबी के हस्तक्षेप पर उठे सवाल

सरलीकरण की मांग तेज, डाक बंगले की बैठक में आंदोलन की चेतावनी
SIDHARTHNAGAR NEWS: पेड़ कटान से जुड़े जटिल नियमों और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के हस्तक्षेप से नाराज किसानों, लघु बढ़ई कामगारों व लकड़ी ठेकेदारों ने डाक बंगले पर बैठक कर आवाज बुलंद की। वक्ताओं ने कहा कि कानून की मंशा संरक्षण की है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका अनुपालन किसानों के लिए उलझन और परेशानी का कारण बन गया है। किसानों ने कहा कि सामाजिक वानिकी के तहत अपनी जमीन पर लगाए गए पेड़ों को काटने में भी अनुमति की बाध्यता उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचा रही है। सूखे या बेकार हो चुके पेड़ों के लिए भी एनएससी के नाम पर प्रति पेड़ करीब एक हजार रुपये जमा कराने की शर्त छोटे किसानों के लिए अव्यवहारिक है। भारतीय किसान यूनियन के ब्लॉक अध्यक्ष हदीस अहमद ने कहा, नियमों का उद्देश्य सही हो सकता है, लेकिन वर्तमान प्रक्रिया किसानों के हित में नहीं है। इसे सरल और व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए।पूर्व चेयरमैन गन्ना समिति किसान अकील अहमद उर्फ मुन्नू ने कहा,पेड़ कटान के मामलों में एसएसबी के हस्तक्षेप से किसानों में भय का माहौल है। इससे लोग पेड़ लगाने से भी पीछे हट सकते हैं, जो पर्यावरण के लिए ठीक नहीं होगा। पूर्व प्रधान अशफाक अहमद ने कहा, कलमी आम समेत कई प्रजातियों पर छूट के बावजूद जमीनी स्तर पर शोषण की शिकायतें मिल रही हैं, जिससे नियमों की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।” वहीं पूर्व प्रधान अनुज प्रताप चौधरी ने नियमों में स्पष्टता और समन्वय की कमी को समस्या की जड़ बताया। लघु बढ़ई कामगारों व ठेकेदारों ने भी कहा कि अनुमति प्रक्रिया की जटिलता और स्पष्ट जानकारी के अभाव से उनका काम प्रभावित हो रहा है। सभी ने एक स्वर में मांग की कि सूखे पेड़ों के कटान में सरल प्रक्रिया लागू हो और अनावश्यक हस्तक्षेप रोका जाए। अंत में किसानों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द नियमों का सरलीकरण नहीं किया गया तो यह मुद्दा शासन से लेकर सदन तक उठाया जाएगा और सड़कों पर उतरकर आंदोलन किया जाएगा।