PRATAPGARH NEWS: देश के श्रम संगठनों के आह्वान पर जनपद प्रतापगढ़ में आम हड़ताल में विभिन्न मजदूर कर्मचारी संगठनों ने अपनी भागीदारी किया बीमा बैंक, रेलवे,पोस्ट , लोक निर्माण विभाग, राज्य कार्यालय सहित अनेक संस्थानों में कर्मचारी हड़ताल पर रहे। हड़ताल में आवश्यक सेवाओं को छोड़कर लगभग सभी क्षेत्रों पर व्यापक प्रभाव रहा।उल्लेखनीय है कि आम हड़ताल का आह्वान केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चार श्रम संहिता को रद्द किए जाने, बिजली संशोधन विधेयक बीज संशोधन विधेयक को वापस लिए जाने, मनरेगा को समाप्त कर वी बी राम जी योजना को वापस लिए जाने मनरेगा को बहाल किए जाने, न्यूनतम वेतन 26000 किए जाने, पुरानी पेंशन योजना बहाल किए जाने, शिक्षा स्वास्थ्य बिजली रेलवे कोयला तेल भेल सहित सभी सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगाई जाने, स्कीम वर्क्स को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिए जाने, आउटसोर्सिंग ठेका प्रथा को समाप्त किए जाने, स्थाई रोजगार का सृजन किए जाने, नियमित प्रकृति के कार्य पर स्थाई कर्मचारियों को भर्ती किए जाने, बैंक बीमा के क्षेत्र में एफडीआई वापस लिए जाने, ई-श्रम और बी ओ बोर्ड में पंजीकृत सभी श्रमिकों को आयुष्मान कार्ड जारी किए जाने आदि मांगों पर आहूत रहा। जनपद भर में अनेक स्थान पर कर्मचारी और मजदूर संगठनों के द्वारा अलग-अलग प्रदर्शन किए गए। जिला मुख्यालय पर कलेक्ट्रेट में श्रम संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से एक सभा का आयोजन दिन में 12:00 बजे किया गया। जिसकी अध्यक्षता जिला ट्रेड यूनियन काउंसिल के अध्यक्ष हेमंत नंदन ओझा ने किया। सभा को प्रमुख रूप से डी टी यू सी के संरक्षक रामबरन सिंह, ए आई टी यू सी के बेचन अली, रामसमुझ मौर्य, उत्तर प्रदेश बैंक एम्पलाइज यूनियन के अध्यक्ष नरेंद्र प्रसाद मिश्र, राज मणि पाण्डे सी पी आई, हरी राज यादव पूर्व मंत्री रेलवे मेंस यूनियन ,स्वायत्त शासी कर्मचारी महासंघ के महामंत्री रोशन, अध्यक्ष मुकेश वाल्मीकि, मनरेगा संघ के अध्यक्ष अनिल कुमार यादव, उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक यूनियन के मंत्री राघवेंद्र मिश्र अध्यक्ष आर डी यादव डाक विभाग के नागेंद्र तिवारी, सुरेंद्र कुमार , माले से रामनरेश पटेल किसान सभा के महामंत्री निर्भय प्रताप सिंह, किसान नेता विजयानंद तिवारी, राम अचल वर्मा , रविंद्र कुमार पाल उत्तर प्रदेश बिजली कर्मचारी संघ आदि ने प्रमुख रूप से इस अवसर पर अपना संबोधन दिया। वक्ताओं ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार लगातार कर्मचारी मजदूर और किसने के अधिकारों पर चोट पहुंचती रही है। पुराने श्रम कानून जिन्हें प्रभावी रूप से लागू करने की आवश्यकता थी उनको समाप्त कर चार श्रम संहिताएं बनाई गई और लोकसभा एवं राज्यसभा में बिना बहस के पास कर दिया गया तथा 21 नवंबर 2025 को इसको लागू करने का नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया इसके चलते देश के श्रमिक उनकी शक्ति कमजोर होगी और पूंजी पति और कॉरपोरेट श्रमिकों को गुलाम बनाएंगे। यूनियन बनाने के अधिकार अत्यंत सीमित हो जाएंगे और हड़ताल करने का अधिकार समाप्त हो जाएगा मजदूर सामूहिक सौदेबादी के अधिकार से वंचित हो जाएंगे, कुल मिलाकर श्रमिकों कर्मचारी संगठनों के द्वारा अब तक जो अधिकार और सुविधाएं हासिल की गई हैं, वह समाप्त हो जाएंगे। काम के घंटे 8 से बढ़कर 12 घंटे कर दिए जाएंगे ओवर टाइम की सीमा 75 घंटे से बढ़कर 125 से 140 घंटे कर दिया गया है ,300 कर्मचारी तक के वाले कारखाने पर कोई श्रम कानून लागू नहीं होगा। वक्ताओं ने इस अवसर पर आउटसोर्सिंग एवं ठेका प्रथा को समाप्त किए जाने पर बल दिया। सभा के अंत में जिलाधिकारी के प्रतिनिधि के रूप में तहसीलदार सदर ने कार्यक्रम स्थल पर आकर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन प्राप्त किया ज्ञापन में श्रम संहिताओं को रद्द किए जाने सहित 13 सूत्री मांगे रही ,इस अवसर पर उपस्थित लोगों द्वारा इंकलाब जिंदाबाद, मजदूर कर्मचारी एवं किसान एकता जिंदाबाद, चार श्रम संहिता रद्द की जाए, पुराने श्रम कानून बहाल किया जाए, पुरानी पेंशन योजना बहस की जाए, आउटसोर्सिंग ठेका प्रथा समाप्त की जाए आवाज दो हम एक हैं आदि नारे लगा रहे थे। जिला ट्रेड यूनियन काउंसिल की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से श्रमिक नेता हेमंत नंदन ओझा ने जनपद के विभिन्न कर्मचारी मजदूर संगठनों और उससे जुड़े सदस्यों को आम हड़ताल में सहभागिता करने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया, और उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा मजदूर कर्मचारी किसान विरोधी नीतियों के विरुद्ध होने वाले संघर्षों में अधिक मजबूत एकता के साथ शामिल होंगे।







