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दिमाग से चलेगा ‘बायोनिक हाथ’: प्रयागराज के 18 वर्षीय छात्र अंश मिश्रा का कमाल।

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प्रातःकाल एक्सप्रेस | प्रयागराज
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद) के 18 वर्षीय होनहार छात्र अंश मिश्रा ने अपनी अनोखी प्रतिभा से चिकित्सा और तकनीक जगत को चौंका दिया है। अंश ने एक ऐसा ‘ब्रेन-कंट्रोल्ड बायोनिक हैंड’ विकसित किया है, जो सीधे मानव मस्तिष्क के विद्युत संकेतों (Brain Signals) के जरिए संचालित होता है।
इस नवाचार के पीछे एक भावनात्मक प्रेरणा भी है। अंश की दोस्त शाहीन पिछले 15 वर्षों से बिना हाथ के जीवन जी रही हैं। उनके संघर्ष को करीब से देखने के बाद अंश ने ठान लिया कि वह एक ऐसा सस्ता और प्रभावी समाधान तैयार करेंगे, जिससे दिव्यांग लोगों को नई जिंदगी मिल सके।
अंश का यह प्रोजेक्ट ‘BRHM’ (Brain Responsive Hand Mechanism) नाम से जाना जा रहा है। खास बात यह है कि जहां अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस तरह के बायोनिक हाथों की कीमत ₹15 लाख से ₹30 लाख तक होती है, वहीं अंश ने इसे मात्र ₹40,000 की लागत में तैयार कर लिया। यानी यह तकनीक लगभग 90% तक सस्ती है।
यह बायोनिक हाथ दिमाग के सिग्नल्स को सेंसर के माध्यम से पढ़ता है और उसी के अनुसार मूवमेंट करता है। इसकी क्षमता इतनी मजबूत है कि यह करीब 20 किलो तक का वजन उठाने में सक्षम है। यह तकनीक न सिर्फ सस्ती है, बल्कि उपयोग में भी बेहद सहज और प्रभावी बताई जा रही है।
अंश मिश्रा को उनके इस शानदार आविष्कार के लिए Samsung Solve for Tomorrow प्रतियोगिता में विजेता भी चुना गया है, जो देशभर के युवा नवाचारों को प्रोत्साहित करने वाला एक प्रतिष्ठित मंच है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आविष्कार भारत में लाखों दिव्यांगों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है, जो अब तक महंगी तकनीक के कारण कृत्रिम अंग नहीं अपना पा रहे थे।
अंश मिश्रा की यह सफलता यह साबित करती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद भारतीय युवा अपनी सोच और नवाचार के दम पर वैश्विक समस्याओं का किफायती समाधान देने में सक्षम हैं। यह उपलब्धि न सिर्फ प्रयागराज, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है।