Home उत्तर प्रदेश डायट में दो दिवसीय शोध कार्यशाला सम्पन्न, शिक्षकों को मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण

डायट में दो दिवसीय शोध कार्यशाला सम्पन्न, शिक्षकों को मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण

KAUSHAMBI NEWS: जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) मंझनपुर में 28-29 मार्च को दो दिवसीय शोध कार्यशाला का आयोजन प्राचार्य उप शिक्षा निदेशक निधि शुक्ला के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों व  प्रशिक्षुओं में शोध संबंधी समझ विकसित करना और उन्हें व्यावहारिक रूप से शोध कार्य के लिए सक्षम बनाना रहा। कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर के वनस्पति विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रामवंत गुप्ता ने शोध की अवधारणा, शोध रिपोर्ट लेखन व पाण्डुलिपि के स्वरूप और प्रकारों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने शोध को वैज्ञानिक, व्यवस्थित व प्रमाणिक प्रक्रिया बताते हुए गुणवत्तापूर्ण शोध लेखन के लिए प्रेरित किया। सी.एम.पी. डिग्री कॉलेज, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शिक्षा शास्त्र विभाग के डॉ. दिलीप कुमार सिंह ने क्रियात्मक शोध की अवधारणा, उसके क्रियान्वयन की विधियां, आवश्यक सावधानियां, शोध विषय के चयन व डेटा सैंपलिंग की प्रक्रिया को सरल व व्यावहारिक ढंग से समझाया। ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज के शिक्षा शास्त्र विभाग के डॉ. अविनाश पाण्डेय ने शोध का अर्थ, उसकी अवधारणा व विभिन्न प्रकारों पर विस्तार से चर्चा की। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के डॉ. केयूर पाठक ने एथनोग्राफी विषय पर विस्तृत व्याख्यान देते हुए समाज, समुदाय, संस्कृति, व्यवहार एवं परंपराओं के गहन अध्ययन की प्रक्रिया को स्पष्ट किया। उन्होंने इस प्रकार के शोध में अपनाई जाने वाली सावधानियों एवं  टूल्स के प्रभावी उपयोग पर भी प्रकाश डाला।
द्वितीय दिवस पर सेंट जुड चिल्ड्रेन रिसर्च हॉस्पिटल, यूएसए के डॉ. शुभम यादव ने शोध में उपयोग किए जाने वाले टूल्स व  आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी और प्रतिभागियों के प्रश्नों का समाधान किया। नेशनल अवार्डी, एनसीएससी/आईएससी फाउंडर व सीईओ अभिषेक कुशवाहा द्वारा सत्रों का समन्वय किया गया, जिससे कार्यशाला का संचालन सुव्यवस्थित रहा। कार्यशाला के प्रत्येक सत्र में प्रतिभागियों को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ, जो भविष्य में उन्नत शोध कार्य के लिए सहायक होगा। कार्यक्रम में डायट के प्रवक्तागण, डीएलएड प्रशिक्षु, प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक उपस्थित रहे। प्राचार्य निधि शुक्ला ने बताया कि एससीईआरटी, लखनऊ के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यशाला से प्रतिभागियों में शोध के प्रति जागरूकता एवं रुचि का विकास हुआ है। कार्यशाला के माध्यम से शोध लेखन, रिपोर्ट तैयार करने, डेटा संग्रहण तथा क्रियात्मक शोध के जरिए शिक्षण में सुधार के उपायों की व्यावहारिक समझ विकसित हुई। साथ ही एथनोग्राफी जैसे उन्नत शोध की जानकारी भी प्राप्त हुई, जिससे शिक्षकों को कक्षा-कक्षीय समस्याओं के समाधान के लिए शोध आधारित दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा मिलेगी। कार्यशाला के नोडल डॉ. अनामिका सिंह, डॉ. वंदना सिंह, डॉ. प्रमोद कुमार सेठ व डॉ. दिनेश कुमार यादव रहे। कार्यक्रम में डॉ. देवेश यादव, धीरज कुमार, शबनम सिद्दीकी, डॉ. संदीप तिवारी सहित समस्त प्रवक्ता उपस्थित रहे।