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टोल प्लाजा कर्मचारियों को नहीं मिला वेतन, कंपनी पर शोषण का आरोप, उपजिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

PRAYAGRAJ NEWS:  बारा तहसील क्षेत्र स्थित एनएच-30 पर गन्ने टोल प्लाजा के कर्मचारियों ने वेतन न मिलने से नाराज होकर प्रशासन के समक्ष अपनी समस्या उठाई है। टोल प्लाजा पर कार्यरत करीब 11 कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें पिछले कई महीनों से वेतन नहीं दिया गया है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। इस संबंध में कर्मचारियों ने उपजिलाधिकारी बारा और सहायक पुलिस आयुक्त बारा को ज्ञापन सौंपकर न्याय की मांग की है।
कर्मचारियों का कहना है कि वे कोरल एसोसिएट कंपनी के अंतर्गत कार्यरत हैं और कंपनी द्वारा मई और जून 2025 का वेतन अब तक नहीं दिया गया है। आरोप है कि जब भी वेतन की मांग की जाती है, कंपनी के अधिकारी उन्हें आश्वासन देकर टाल देते हैं। कर्मचारियों ने यह भी बताया कि बीते सात महीनों से लगातार वेतन भुगतान का भरोसा दिया जा रहा था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ज्ञापन में कर्मचारियों ने कंपनी के महाप्रबंधक संतोष दुबे, दुर्गेश टाग, प्रबंधक अनिल मिश्रा, राघवेंद्र सिंह और कैशियर सूरज पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि 27 मार्च 2026 को टोल प्लाजा का अनुबंध समाप्त होने वाला है, ऐसे में जब उन्होंने अपने बकाया वेतन की मांग की तो अधिकारियों ने साफ इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, कर्मचारियों के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया और उन्हें फर्जी मुकदमे में फंसाने तथा जान से मारने की धमकी भी दी गई। पीड़ित कर्मचारियों ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि कंपनी के अधिकारी भुगतान से बचने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं और उनके साथ कोई अप्रिय घटना हो सकती है। ऐसे में उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा प्रदान करने की मांग भी की है। कर्मचारियों ने ज्ञापन के माध्यम से कंपनी के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने, बकाया वेतन का तत्काल भुगतान सुनिश्चित कराने और टोल प्लाजा के वित्तीय लेनदेन की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में कोई अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों पर जुर्माना लगाया जाए। अंत में कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो वे 20 मार्च 2026 से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी अप्रिय स्थिति के लिए प्रशासन, शासन और संबंधित एजेंसियां जिम्मेदार होंगी।