Home आस्था गुरु पूर्णिमा पर कबीर साहेब सत्संग मिशन में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

गुरु पूर्णिमा पर कबीर साहेब सत्संग मिशन में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

संतवाणी एवं भजनों से भक्तिमय हुआ वातावरण
VARANASI NEWS: गुरु पूर्णिमा के पावन एवं आध्यात्मिक पर्व पर बुधवार को ग्राम- घूरीपुर, पोस्ट- उदयपुर, थाना सारनाथ स्थित सद्गुरु कबीर साहेब सत्संग मिशन (एकनामी) में भव्य गुरु पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर पूर्वांचल सहित उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, राजस्थान, दिल्ली तथा देश के विभिन्न राज्यों से हजारों कबीरपंथी श्रद्धालुओं एवं संत-महात्माओं ने उपस्थित होकर सद्गुरु के श्रीचरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की। प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं का आगमन प्रारंभ हो गया था। संपूर्ण आश्रम परिसर “सद्गुरु कबीर साहेब की जय” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा मानव जीवन में सद्गुरु की महत्ता का स्मरण किया। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के रूप में कबीर साहेब सत्संग मिशन के अध्यक्ष सुनील साहेब एवं गुरुमाता ने भक्तों को सत्संग का अमृतपान कराया। अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में उन्होंने कहा कि गुरु ही वह दिव्य शक्ति हैं, जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। कबीर साहेब ने सदैव सत्य, प्रेम, समरसता, मानवता और आत्मबोध का संदेश दिया है। यदि मनुष्य सद्गुरु के बताए मार्ग पर चले तो उसका जीवन सफल एवं सार्थक हो सकता है। इस अवसर पर संत-महात्माओं द्वारा कबीर साहेब के दोहे, साखियाँ, रमैनियाँ तथा निर्गुण भजनों का अत्यंत मधुर एवं भावपूर्ण गायन प्रस्तुत किया गया। श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होकर कबीर वाणी का रसास्वादन करते रहे। संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्तिमय उल्लास से परिपूर्ण हो गया। कार्यक्रम में कबीर साहेब की अमूल्य वाणी का विशेष रूप से स्मरण किया गया—
“गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय। बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय॥”संतों ने बताया कि गुरु ही वह माध्यम हैं, जिनके द्वारा परमात्मा की प्राप्ति संभव होती है। इसलिए गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। एक अन्य साखी का भी भावपूर्ण गायन किया गया—
“पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥” संतों ने कहा कि केवल पुस्तकीय ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रेम, करुणा और सद्भाव ही वास्तविक ज्ञान का आधार हैं। सत्संग के दौरान कबीर साहेब की यह वाणी भी श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का केंद्र रही—
“माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर। कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर॥” संतों ने कहा कि बाहरी आडंबरों से अधिक आवश्यक मन की शुद्धता और आत्मचिंतन है। कार्यक्रम में कबीर साहेब की रमैनी एवं निर्गुण वाणी का भी अत्यंत मधुर गायन किया गया, जिसमें मानव जीवन की क्षणभंगुरता, सत्य की साधना तथा गुरु की महिमा का मार्मिक वर्णन किया गया। संतों ने कहा कि कबीर साहेब का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना सदियों पहले था। उनके विचार समाज में समरसता, समानता और भाईचारे की भावना को सुदृढ़ करते हैं। संतों ने श्रद्धालुओं का आह्वान किया कि वे जाति, पंथ, ऊँच-नीच और भेदभाव से ऊपर उठकर मानव सेवा, सत्य, अहिंसा और सदाचार के मार्ग पर चलें। यही कबीर साहेब की वाणी का वास्तविक संदेश है। गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान बाहर से आए संतों एवं श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे एवं महाप्रसाद वितरण की भी उत्कृष्ट व्यवस्था की गई। हजारों श्रद्धालुओं ने एक साथ प्रसाद ग्रहण कर सद्भाव, समानता और सेवा की भावना का परिचय दिया। मिशन के स्वयंसेवकों ने पूरे कार्यक्रम में अनुशासन एवं व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समापन अवसर पर अध्यक्ष सुनील साहेब ने सभी संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मजागरण, गुरु-भक्ति और मानव कल्याण का महापर्व है। उन्होंने सभी से कबीर साहेब की शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात करने तथा समाज में प्रेम, शांति, सद्भाव और सेवा का संदेश प्रसारित करने का आह्वान किया। गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति, आध्यात्मिक चिंतन एवं सामाजिक समरसता का अनुपम उदाहरण बनकर संपन्न हुआ। कार्यक्रम में उपस्थित हजारों श्रद्धालु कबीर साहेब की वाणी और सद्गुरु के आशीर्वचनों से भावविभोर होकर अपने-अपने गंतव्य के लिए प्रस्थान किए।