KAUSHAMBI NEWS: शासन के निर्देश पर जनपद के को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े परिषदीय विद्यालयों में बुधवार को ‘नवआरंभ उत्सव’ का आयोजन उत्साह और उल्लास के साथ किया गया। इसी क्रम में कड़ा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय हिसामपुर परसखी स्थित को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्र में कार्यक्रम धूमधाम से संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में अभिभावकों ने भाग लेकर बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के प्रति अपनी सजगता दिखाई। कार्यक्रम का उद्देश्य आंगनबाड़ी से कक्षा-1 तक बच्चों के सहज संक्रमण (स्कूल रेडीनेस) को सुनिश्चित करना तथा अभिभावकों को प्रारंभिक शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक करना रहा। इस दौरान 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए बाल वाटिका में प्रवेश तथा 6 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके बच्चों के कक्षा-1 में नामांकन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में बच्चों का रोली-टीका लगाकर स्वागत किया गया, जिससे उनके मन में विद्यालय के प्रति आकर्षण एवं अपनत्व की भावना विकसित हो सके। परिसर में आकर्षक शैक्षिक स्टाल भी लगाए गए, जिनके माध्यम से खेल-खेल में सीखने की गतिविधियों, टीएलएम (शैक्षिक सामग्री) एवं नई शिक्षा नीति के तहत संचालित गतिविधियों की जानकारी अभिभावकों को दी गई। शिक्षिका माया सिंह ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए बताया कि प्रारंभिक अवस्था में दी गई शिक्षा बच्चों के संपूर्ण विकास की नींव होती है। उन्होंने विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं जैसे निःशुल्क पाठ्यपुस्तक, यूनिफॉर्म, मध्यान्ह भोजन, छात्रवृत्ति एवं अन्य शासकीय योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों का समय से नामांकन कराकर उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करें।
इस अवसर पर शिक्षक बीरेंद्र कुमार एवं संध्या देवी पटेल ने भी अभिभावकों को ‘निपुण भारत मिशन’ के तहत संचालित गतिविधियों, बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN) के महत्व के बारे में जानकारी दी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सांवला देवी ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर मिलने वाली सुविधाओं एवं पोषण संबंधी सेवाओं की जानकारी साझा की। कार्यक्रम के दौरान अभिभावकों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। शिक्षकों ने यह भी बताया कि विद्यालय में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए खेल, गतिविधि आधारित शिक्षण एवं सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जा रहा है। अंत में अभिभावकों को प्रेरित किया गया कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजें, जिससे वे शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक एवं नैतिक मूल्यों का भी विकास कर सकें। कार्यक्रम ने अभिभावकों में सकारात्मक संदेश देते हुए नामांकन के प्रति उत्साह का माहौल बनाया।







