Home उत्तर प्रदेश कूटरचित दस्तावेज से खनन पट्टा लेने का आरोप

कूटरचित दस्तावेज से खनन पट्टा लेने का आरोप

ओमैक्स मिनरल्स के निदेशक के खिलाफ कोर्ट ने दिया एफआईआर के आदेश
SONBADHR NEWS: (विवेक पाण्डेय) खनन पट्टा लेने के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के आरोप में न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/सिविल जज (सीनियर डिवीजन), सोनभद्र ने मेसर्स ओमैक्स मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सचिन अग्रवाल समेत संबंधित विपक्षीगण के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने का आदेश थाना जुगैल पुलिस को दिया है। आदेश 12 अगस्त 2026 को प्रकीर्ण प्रार्थना पत्र संख्या 681/2026, चंदन दूबे बनाम सचिन अग्रवाल आदि की सुनवाई के दौरान दिया गया। प्रकरण में आवेदक की ओर से अधिवक्ता ब्रज भूषण तिवारी ने न्यायालय के समक्ष पक्ष रखा। प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया कि ग्राम खेबंधा, थाना जुगैल, तहसील ओबरा क्षेत्र में 7 हेक्टेयर भूमि पर बालू/मोरंग खनन के लिए पांच वर्ष का पट्टा 9 जनवरी 2023 से 8 जनवरी 2028 तक मेसर्स ओमैक्स मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में स्वीकृत हुआ था। इसकी रजिस्ट्री 23 जनवरी 2023 को कराई गई। आवेदक का आरोप है कि रजिस्ट्री के समय सचिन अग्रवाल ने कंपनी के निदेशक के रूप में दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए और फोटो भी कराई, जबकि उनके अनुसार सचिन अग्रवाल 14 नवंबर 2022 को ही निदेशक पद से इस्तीफा दे चुके थे। आरोप है कि निदेशक पद पर न रहते हुए भी सरकारी दस्तावेजों में निदेशक के रूप में हस्ताक्षर कर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए और इससे खनन पट्टे से लाभ लिया गया। मामले में शिकायत थाना स्तर पर किए जाने के बाद पुलिस अधीक्षक सोनभद्र सहित संबंधित अधिकारियों को भी प्रार्थना पत्र भेजे जाने का उल्लेख न्यायालय में किया गया। कार्रवाई न होने पर आवेदक ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान विभिन्न दस्तावेजी साक्ष्य भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए। न्यायालय ने पत्रावली और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद प्रकरण को गंभीर और संज्ञेय अपराध की श्रेणी का माना। आदेश में कहा गया कि मामले में लगाए गए आरोप जांच और विवेचना का विषय हैं तथा पुलिस से विवेचना कराया जाना न्यायोचित है। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के ललिता कुमारी बनाम राज्य के फैसले का भी उल्लेख किया। इसके बाद न्यायालय ने आवेदक चंदन दूबे का प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए थानाध्यक्ष जुगैल, सोनभद्र को प्रार्थना पत्र में कथित तथ्यों के आधार पर अभियोग पंजीकृत कर नियमानुसार विवेचना सुनिश्चित करने का आदेश दिया।मामले में अधिवक्ता ब्रज भूषण तिवारी द्वारा न्यायालय में आवेदक का पक्ष रखा गया।