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कर्बला के शहीदों की याद में शबीहे अलम, ताबूत व ज़ुलजनाह का जुलूस निकाला गया

ज़ुलजनाह को देख बिलख पड़े अजादार

JAUNPUR NEWS: (शाहिद वारसी) 8 सफ़र के मौके पर गुरुवार की देर रात अटाला स्थित इमामबाड़ा शेख इल्तेफात हुसैन अजाखाना में कर्बला के शहीदों की याद में मजलिस का एहतेमाम किया गया। मजलिस के समापन के बाद शबीहे अलम, ताबूत व ज़ुलजनाह का जुलूस बड़े ही एहतराम के साथ बरामद हुआ। जुलूस में बड़ी संख्या में अजादार शामिल हुए। नौहाख्वानी और मातम के बीच या हुसैन या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं। मसायब सुनकर अजादारों की आंखों से आंसू छलक पड़े। मजलिस को उरूज हैदर खां सुल्तानपुरी ने खिताब किया, जबकि बिलाल हसनैन जौनपुरी ने तकरीर की। सोजख्वानी सैयद अली काविश और उनके हमनवा साहिबान ने की। पेशख्वानी शमशाद हुसैन और एहतेशाम जौनपुरी ने की। मजलिस के दौरान अंजुमन शमशीरे हैदरी, अंजुमन सज्जादिया, अंजुमन हैदरी और अंजुमन मश्क-ए-सकीना ने दर्द भरे नौहे पेश किए। नौहाख्वानी के बीच अजादार सीनाजनी करते हुए गम में डूबे नजर आए। मसायब का बयान होते ही मजलिस में मौजूद अजादारों की आंखें गम में डूब गई और नौहाख्वानी के दौरान अजादारों ने सीनाजनी कर शहीदान-ए-कर्बला को पुरसा पेश किया। तकरीर के दौरान बिलाल हसनैन जौनपुरी ने बताया  कि यज़ीदी हुकूमत ने अहल-ए-बैत पर जुल्म की सारी हदें पार कर दी थीं।छोटे-छोटे बच्चों तक को पानी से महरूम रखा गया। उन्होंने बताया कि यौमे-ए-आशूर के दिन जब हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम मैदान-ए-कर्बला की ओर रवाना हुए, तो जनाबे ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा ने उन्हें अलविदा किया। उसी वक्त उनकी मासूम बेटी जनाबे सकीना सलामुल्लाह अलैहा अपने बाबा के घोड़े से लिपटकर रोने लगीं। इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम घोड़े से उतरे, बेटी को सीने से लगाया इसके बाद उन्होंने बेटी को अलविदा कहा और मैदान-ए-कर्बला की ओर अपनी आखिरी जंग के लिए रवाना हो गए।
मजलिस के बाद निकाले गए शबीहे अलम, ताबूत और ज़ुलजनाह के जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। ज़ुलजनाह की जियारत के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाओं ने भी फूल-मालाएं पेश कर अपनी-अपनी मन्नतें मांगीं। नौहाख्वानी और मातम के बीच पूरा कार्यक्रम गम और अकीदत के माहौल में संपन्न हुआ।