LAKHIMPUR KHERI NEWS: गुरुवार को सरकार द्वारा खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की घोषणा के बाद भी किसान वर्ग संतुष्ट नहीं है। किसानों का कहना है कि खाद, बीज, डीजल, बिजली, कीटनाशक और मजदूरी की बढ़ती लागत के मुकाबले न्यूनतम समर्थन मूल्य में की गई बढ़ोतरी बहुत कम है।भारतीय किसान संघ चढूनी के जिला अध्यक्ष बलकार सिंह ने कहा कि दिन-रात खेतों में मेहनत करने वाले किसानों को आज भी फसलों का सही दाम नहीं मिल रहा। सरकार आंकड़ों में किसानों को लाभ दिखा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि किसान घाटे और कर्ज में दबा हुआ है। बलकार सिंह ने बताया कि किसानों की मुख्य मांग है कि फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य स्वामीनाथन आयोग की लागत जमा 50 प्रतिशत सिफारिश के अनुसार तय किया जाए। साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी गारंटी दी जाए और बढ़ती लागत के हिसाब से फसलों के दाम तय हों। उन्होंने कहा कि केवल घोषणाओं से किसानों की आय नहीं बढ़ेगी। इसके लिए ठोस कदम उठाने होंगे। जब तक किसान को उसकी मेहनत का पूरा मूल्य नहीं मिलेगा, तब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने की घोषणाओं से किसान खुश या संतुष्ट नहीं हो सकता। बलकार सिंह ने दो टूक कहा कि अन्नदाता मजबूत होगा तभी देश मजबूत होगा। किसानों ने सरकार से मांग की है कि खेती की वास्तविक लागत को देखते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाए ताकि खेती घाटे का सौदा न रहे।







