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उच्च न्यायालय के आदेश का महिला कल्याण विभाग के अधिकारी कर रहे अवहेलना

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हाईकोर्ट इलाहाबाद ने आदेश दिया है कि फाइनेंस लिट्रेसी एवं डाटा इंट्री ऑपरेटर की संविदा बहाल रखी जाय, बकाया मानदेय का भुगतान किया

Allahabad  High Court के आदेश के बाद भी विभाग ने अभी तक उक्त कर्मियों का एक वर्ष का बकाया मानदेय का भुगतान नहीं किया है।

उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत जनपद स्तर पर जिला कार्यक्रम समन्वय एवं कार्यक्रम सहायक की नियुक्ति संविदा पर स्वास्थ्य विभाग में की गई थी। योजना स्वास्थ्य विभाग से महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग को अप्रैल 2024 में ट्रांसफर कर दी गई। योजना स्थानांतरण से पूर्व 8 जून 2023 को मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन की अध्यक्षता में बैठक हुई। जिसमें प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं प्रमुख सचिव,सचिव महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग सहित अन्य अधिकारी बैठक में उपस्थित रहे। जिसमें यह निर्णय लिया गया कि उक्त योजना के तहत कार्यरत जिला कार्यक्रम समन्वयक एवं कार्यक्रम सहायक का समायोजन मिशन शक्ति के हब फार इम्पावरमेंट ऑफ वूमेन में फाइनेंशियल लिट्रेसी एवं कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर संविदा पर समायोजन किया गया।

निदेशक महिला कल्याण विभाग लखनऊ ने 2023 में उक्त कर्मियों के समायोजन संबंधी आदेश की सूचना सभी जिला प्रोबेशन अधिकारी को पत्र भेजकर अवगत कराया। साथ ही मानदेय भुगतान करने हेतु बजट भी जारी कर दिया। जिसके आधार पर जिला प्रोबेशन अधिकारी ने जून 2023 से जुलाई 2024 तक मानदेय संविदा के आधार पर भुगतान किया है। लेकिन अक्टूबर 2024 में निदेशक महिला कल्याण विभाग लखनऊ ने उक्त पदों पर आउटसोर्स से भर्ती किए जाने का आदेश सभी जिलाधिकारी को दे दिया। आउटसोर्स से भर्ती किए जाने के खिलाफ प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के कर्मियों ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका दाखिल कर उक्त पदों को संविदा पर यथावत बनाए रखने एवं बकाया मानदेय का भुगतान संविदा के आधार पर करने की मांग किया।जिस पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने दोनों पक्षों की लंबी सुनवाई के बाद फाइनेंस लिट्रेसी एवं डाटा इंट्री ऑपरेटर को पद को आउटसोर्स से नियुक्ति पर रोक लगाते हुए संविदा पर यथावत बनाए रखने एवं बकाया मानदेय का भुगतान संविदा के आधार पर देने एवं आगे का कार्य संविदा के आधार पर लेने का आदेश दिया है।
उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा आदेश जारी किए हुए करीब दो माह बीतने वाला है लेकिन अभी तक महिला कल्याण विभाग के जिला प्रोबेशन अधिकारी एवं शासन स्तर के अधिकारी उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन नहीं किया है।जिसके कारण उक्त कर्मी काफी परेशान है।
अब सबसे हैरानी की बात है कि योगी सरकार में अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मियों का शोषण करने से बाज नहीं आ रहे है। संविदा कर्मियों को जबरन आउटसोर्स पर एजेंसी के माध्यम से रखने का खेल खेला जा रहा है ताकि एजेंसियों के माध्यम से मोटी रकम की वसूली जा सके।

अब देखना होगा कि महिल कल्याण विभाग के जनपद एवं शासन स्तर के अधिकारी उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना कब तक करते है।