Home बड़ी ख़बरें ईरान की आबादी, मज़हबी बनावट और अल्पसंख्यकों की नुमाइंदगी — एक नज़र

ईरान की आबादी, मज़हबी बनावट और अल्पसंख्यकों की नुमाइंदगी — एक नज़र

13
0

मध्य पूर्व के अहम देश ईरान की कुल आबादी लगभग 9.3 करोड़ (93 मिलियन) बताई जाती है। यहां की आबादी में बड़ी संख्या शिया मुसलमानों की है, जबकि एक उल्लेखनीय हिस्सा सुन्नी मुसलमानों और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों का भी है।

शिया और सुन्नी आबादी

आधिकारिक और विभिन्न आकलनों के अनुसार:

  • लगभग 89% आबादी शिया मुसलमान है, जो बारह इमाम (12 इमाम) के मानने वाले हैं।
  • करीब 10% आबादी सुन्नी मुसलमानों की है।

ईरान में सुन्नी मुसलमानों के इलाकों में करीब 15,000 मस्जिदें और लगभग 3,000 मदरसे बताए जाते हैं। ये ज़्यादातर प्रांतों जैसे:

  • कुर्दिस्तान प्रांत (ईरान)
  • सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत
  • खुज़ेस्तान प्रांत

में मौजूद हैं, जहाँ सुन्नी आबादी अपेक्षाकृत अधिक पाई जाती है। राजधानी तेहरान में सुन्नी मुसलमान आमतौर पर उन्हीं मस्जिदों में नमाज़ अदा करते हैं जहाँ शिया मुसलमान भी जाते हैं।

संसद (मजलिस) में नुमाइंदगी

ईरान की संसद, जिसे मजलिस कहा जाता है, में कुल 290 सदस्य होते हैं। इनमें चुनाव जीतकर आने वाले प्रतिनिधियों में कुछ सुन्नी मुस्लिम सदस्य भी शामिल होते हैं।

इसके अलावा संविधान के तहत धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए 5 सीटें आरक्षित हैं:

  • यहूदी समुदाय – 1 सीट
  • ज़ोरोस्ट्रियन (अग्निपूजक) – 1 सीट
  • अर्मेनियाई ईसाई – 1 सीट
  • असीरियन/चाल्डियन ईसाई – 1 सीट
  • अन्य ईसाई प्रतिनिधित्व – 1 सीट

ईरान में यहूदी समुदाय

1979 में हुए ईरानी इस्लामी क्रांति 1979 के बाद कई यहूदियों ने ईरान छोड़ दिया था, लेकिन इसके बावजूद इज़राइल के बाहर मध्य पूर्व में यहूदियों की उल्लेखनीय संख्या आज भी ईरान में मौजूद है।

अनुमान के मुताबिक ईरान में करीब 10,000 यहूदी रहते हैं। इनमें से ज़्यादातर लोग इन शहरों में बसे हुए हैं:

  • तेहरान
  • इस्फ़हान
  • शिराज़

बताया जाता है कि ईरान में यहूदियों के लगभग 100 सिनेगॉग (यहूदी उपासना स्थल) हैं, जिनमें से करीब 30 राजधानी तेहरान में स्थित हैं। इसके अलावा तेहरान में उनके कई स्कूल भी संचालित होते हैं जहाँ वे अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार शिक्षा देते हैं।

धार्मिक और ऐतिहासिक संदर्भ

कुछ इस्लामी रिवायतों और हदीसों में यह भी उल्लेख मिलता है कि अंत समय (क़ियामत) से जुड़ी घटनाओं में इस्फ़हान का नाम आता है, जहाँ बड़ी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने की बात कही गई है। हालांकि इन रिवायतों की अलग-अलग व्याख्याएँ की जाती हैं और इन्हें धार्मिक मान्यता के तौर पर देखा जाता है।

कुल मिलाकर, ईरान की सामाजिक और धार्मिक संरचना में शिया बहुसंख्यक होने के बावजूद सुन्नी मुसलमानों और विभिन्न धार्मिक अल्पसंख्यकों की भी ऐतिहासिक मौजूदगी और संवैधानिक प्रतिनिधित्व देखने को मिलता है।