Home आस्था अहंकार और अनादर के परिणाम होते हैं, विनाशकारी :महंत विनोदानंद शास्त्री

अहंकार और अनादर के परिणाम होते हैं, विनाशकारी :महंत विनोदानंद शास्त्री

राजधानी के कमता स्थित शंकरपुरी में हो रही है श्रीमद् भागवत कथा
LUCKNOW NEWS: एकादश श्रीमद् भागवत कथा, कमता महोत्सव एवं 21 कुंडीय ज्ञान यज्ञ एवं भण्डारे का आयोजन 25 दिसम्बर तक कमता स्थित शंकरपुरी कालोनी में किया जा रहा है। इसमें महंत पंडित विनोदानंद शास्त्री जी महाराज ने बुधवार 17 दिसम्बर को संदेश दिया कि अहंकार और अनादर के विनाशकारी परिणाम होते हैं। आचार्य देवकीनंदन मिश्रा के संयोजन में हो रहे इस वार्षिक 11वें महा अनुष्ठान में आगंतुक सौभाग्यशाली भक्तों ने सरस भजनों का भी आनंद लिया। “भोले बाबा की आ गई बारात चलो सखी दर्शन करें” भजन पर क्या बच्चे और क्या वरिष्ठ सभी झूम उठे। इस कथा का आयोजन दोपहर 3 से रात आठ बजे तक किया जा रहा है। इसके माध्यम से स्वच्छ कमता के प्रति भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है।बुधवार को कथा का आरंभ मंत्रोच्चार से हुआ। उसके उपरांत आवाहन, षोडशोपचार पूजन, आरती, भजन कीर्तन किया गया।केन्द्रीय आकर्षण श्रीमद् भागवत कथा में महंत पंडित विनोदानंद शास्त्री महाराज ने शिव-दक्ष द्रोह प्रसंग की व्याख्या करते हुए संदेश दिया कि अहंकार और अनादर के विनाशकारी परिणाम होते हैं। बात शिव दक्ष प्रसंग की करें तो इसके कारण देवी सती ने आत्मदाह किया और दक्ष के यज्ञ का विध्वंस हुआ था। इस क्रम में महंत पंडित विनोदानंद शास्त्री महाराज ने शिव विवाह प्रसंग का वास्तविक संदेश भी बताया।  उनके अनुसार शिव विवाह, केवल दो आत्माओं का मिलन नहीं, बल्कि आदि शक्ति देवी “पार्वती” और महादेव “शिव” के शाश्वत, ब्रह्मांडीय मिलन का प्रतीक है, जो प्रेम, तपस्या और सृष्टि के संतुलन को दर्शाता है, जहाँ सभी जीव, देवता, असुर और भूत-प्रेत भी एक साथ आते हैं, क्योंकि शिव सभी के आराध्य हैं। यह विवाह तारकासुर के अंत और कार्तिकेय के जन्म का मार्ग प्रशस्त करता है, और यह कथा भक्तों को स्वयं के भीतर शिव और शक्ति के मिलन के माध्यम से आध्यात्मिक जागृति का संदेश देती है।