सरकार ने अभी तक वित्तीय सहायता की मांग पर नहीं उठाया कोई कदम
BHADHOI NEWS: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग पर 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने के बाद से इस उद्योग की स्थिति नाजुक दौर से गुजर रही है। कभी रफ्तार में रहने वाला उद्योग का पहिया थम सा गया है। कुछ कंपनियों द्वारा भले ही सीमित मात्रा में कालीनों का उत्पादन कराया जा रहा। लेकिन अधिकांश हालात पर नजर जमाए हुए हैं और टैरिफ के कम होने या फिर सरकार के वित्तीय मदद का इंतजार कर रहे हैं।
जब तक 25 फीसदी था और 25 फीसदी और टैरिफ को बढ़ाने की घोषणा कर दी गई तो भदोही के निर्यातकों ने घाटा सहते हुए 21 अगस्त तक लगभग एक हजार करोड़ रुपए का कालीन अमेरिका को निर्यात किया। लेकिन उसके बाद यह टैरिफ 50 फीसदी हो गया। ऐसे में अभी भी हजार करोड़ रुपए का तैयार कालीन निर्यातकों के गोदामों में डंप पड़ा हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति की गतिविधियों को देखकर ऐसा नहीं लगता है कि टैरिफ में फिलहाल कोई कमी हो पाएगी। सरकार भी उद्योग को मदद दिए जाने के नाम पर चुप्पी साधे हैं। ऐसे में निर्यातकों को अब इंडिया कार्पेट एक्सपो-2025 के आयोजन पर उम्मीद टिकीं हुई है। फेयर 11 अक्टूबर से शुरू होने वाला है। जो 14 अक्टूबर तक चलेगा। यह फेयर सफल रहता है तो उद्योग का पहिया पुनः गति पकड़ सकता है। अन्यथा संकट से उबारना अत्यंत कठिन होगा। फेयर से है कालीन उद्योग को काफी उम्मीदेंःएजाज अंसारी
वरिष्ठ कालीन निर्यातक एजाज अंसारी ने बताया कि कालीन उद्योग पूर्वी यूपी का सबसे बड़ा उद्योग है। जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था का रीढ़ कहलाता है। लेकिन आज यह उद्योग अमेरिकी टैरिफ के कारण सिसक रहा। इसमें लगे लाखों लोगों की आजीविका खतरे में है। उद्योग की हालत में सुधार के लिए सरकार से विशेष बेलआउट पैकेज की डिमांड की गई है। लेकिन अभी तक कोई कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने कहा कि फेयर की तैयारी चल रही है। उम्मीद की जा रही है कि मेला कामयाब होगा। उद्योग पर छाया संकट का बदल समाप्त हो।







