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अफसर तो अफसर, यहां बाबू भी बेपरवाह….RTO के लिए शासन के आदेश हवाहवाई

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प्रयागराज (विशाल गुप्ता)। सरकारी दफतरों के खुलने और बंद होने के समय को लेकर प्रदेश सरकार सख्त है। इसके लिए समय समय पर बाकायदा दिशा निर्देश भी जारी होते रहे है। शासन प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और सरकार के मंत्री गाहे बगाहे औचक निरीक्षण पर पहुंचकर कठोर कार्रवाई का दम भी भरते रहते हैं। लेकिन शायद प्रयागराज का आरटीओ आॅफिस और यहां के अफसर खुद के आगे किसी को कुछ नहीं समझते। तभी तो बाबू से लेकर अफसर तक सरकारी गाइडलाइन को दरकिनार कर मनमानी करने पर आमादा हैं।

साहब का आना उनकी मर्जी पर
सुबह नौ बजते बजते आमजनो के आने का सिलसिला आरटीओ में शुरू हो जाता है। लेकिन यहां आने वालों को हैरत तब होती है जब उन्हें पता चलता है कि आरटीओ आॅफिस के भीतर ज्यादातर कमरों में सुबह दस बजे के बाद तक ताला ही लटका रहता है। हमारे कैमरामैन और रिपोर्टर ने भी जब इसकी पड़ताल की तो पाया कि लोगोें की बात सही है। सुबह के 11 बजते बजते लगभग 70 फीसदी कर्मचारी और अधिकारी ही काम करने के लिए आॅफिस पहुंचते हैं। इसके बाद तमाम वरिष्ठ अधिकारियों के आने का सिलसिला शुरू होता है। कह सकते हैं कि तकरीबन 12 बजे तक ही ज्यादातर अधिकारी आॅफिस में पहुंच पाते हैं। इसमें भी दो चार ऐसे होते हैं जिनके आने की गारंटी है भी या नहीं, यह यहां आये नागरिकों को तब पता चल पाता है जब तक अधिकारीगण मौके पर उपस्थित न हो जाएं। यह हालात तब है जब आरटीओ के ज्यादातर काम अब आॅनलाइन किए जा चुके हैं।

काम online, offline  के लिए घंटो इंतजार
बता दें कि केन्द्र और प्रदेश सरकार की योजना है कि सभी सरकारी विभागों में कामकाज ज्यादातर Offline किया जाए। इसमे RTO भी शामिल है। यहां पहुंचने वाले आमजनो को कुछ वेरिफिकेशन और हस्ताक्षर के कार्य के लिए ही आना होता है। लेकिन उन्हें परेशानी का सामना तब करना पड़ता है, जब उन्हें पता चलता है कि अधिकारी और कर्मचारी निर्धारित समय पर आए ही नहीं है। इससे उन्हें घंटो इंतजार करना पड़ जाता है। उसमे भी सबसे ज्यादा परेशानी उन्हें होती है जो अपना सभी कामकाज छोड़कर आए होते हैं। ऐसे ही कीडगंज निवासी सौरभ अपनी बाइक रिन्यूवल के लिए यहां आए थे। हमने उनसे बात की तो उन्होंने बताया कि आरसी के लिए फीस जमा करना, डाक्यूमेंट अपलोड करना, बुकिंग अपाइनमेंट समेत सभी कार्य वो आॅनलाइन करके यहां आए हैं। यहां उन्हें केवल डाक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद आरआई से फार्म 25 पर चेसिस नम्बर के पेन्सिल स्केच पर अप्रुवल लेकर अगले पांच साल के लिए आरसी रिन्यूअल का कागज ही लेना भर है। लेकिन इसके लिए उन्हें घंटो इंतजार करना पड़ा। जबकि आॅफिस के खुलने का समय सुबह के 9 बजे से लेकर शाम के 6 बजे तक है।

रिकार्ड रूम का सूरतेहाल आज भी खस्ताहाल
वहीं यहां आए चैफटका निवासी रामजी भाई ने चैकाने वाली जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें अपने डीएल में मोबाइल नम्बर अपडेट करवाना था। यह काम नैनी स्थित आॅफिस से होता है। लेकिन जब वो वहां पहुंचे तो पता चला कि उन्हें पहले अपने डीएल का डेटा फीडिंग करवाना होगा। डेटा हासिल करने के लिए उन्हें पहले धूमनगंज आॅफिस जाना होगा। उन्होंने आपत्ति जाहिर कि और कहा कि उन्हें क्यों दौड़ाया जा रहा है। उनका डीएल 2009 का बना है और इतने वर्षों में विभाग डीएल से संबंधित रिकार्ड ही आॅनलाइन नहीं कर पाया। बता दें कि डेटा फीडिंग में जन्मतिथि, डीएल बनने का समय, पता आदि डिजिटलाइज करवाना होता है। इसके लिए रामजी भाई को नैनी से धूमनगंज तक का चक्कर लगाना पड़ा। यही नही रामजी भाई ने बताया कि यहां रिकार्डरूम में आज भी हजारों फाइले कबाड़ की तरह धूल व गर्दे के बीच रखी हुई हैं। जिन्हें खोजवाने में काफी इंतजार करना पड़ता है। यही नहीं आॅनलाइन काम में भी कुछ दिक्कते हैं।नए दौर में नहीं बदल रहा पुराना रवैया
यहां आए सिविल लाइंस निवासी पवन पांडेय कहते हैं कि वह कोई पन्द्रह साल पहले यहां किसी काम के सिलसिले में आए थे। उस वक्त यहां सभी काम आफलाइन हुआ करते थे। तब आरटीओ में दलालों का जमघट लगा रहता था। उस वक्त आलम कुछ यूं था कि कोई किसी काम के लिए सुन ले तो अपना सौभाग्य ही समझे। तब यहां ज्यादातर काम दलालों के माध्यम से ही हुआ करते थे। उन्होंने कहा कि आज तस्वीर काफी बदल चुकी है। चूंकि अब आॅनलाइन वर्किंग का दौर है। ऐसे में RTO Office में भी काफी बदलाव हो चुका है। बावजूद इसके उन्होंने कहा कि आॅफिस टाईमिंग को लेकर पुराने दौर का अक्स आज भी देखा जा सकता है। अधिकारियों और सरकार को आमजन के हित में इस स्थिति को तत्काल बदलने की जरूरत है। इस सम्बन्ध में जब आरटीओं से सम्पर्क करने की कोशिश किया गया तो उनका फोन नहीं उठा।